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    बिहार त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव में 403 पदों का परिणाम घोषित, 207 पुरुष एवं 176 महिलाएं विजेता

    Updated: Fri, 11 Jul 2025 09:06 PM (IST)

    राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव के नतीजे घोषित किए जिसमें 403 पदों के लिए मतगणना हुई। 207 पुरुष और 176 महिलाएं विजेता रहीं। पहली बार ओसीआर तकनीक का इस्तेमाल किया गया जिससे मतगणना में पारदर्शिता आई और त्रुटि मुक्त परिणाम सुनिश्चित हुए। Patna City news में यह चुनाव महत्वपूर्ण बदलाव लाया।

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    त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव में 403 पदों का परिणाम घोषित

    राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार की देर शाम त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव के परिणाम घोषित कर दिए। 221 मतगणना केंद्रों मतों की गिनती हुई।

    सभी 38 जिलों में 403 पदों के लिए घोषित किए गए परिणाम में पंचायत सदस्य के 174, पंच के 36, मुखिया के 61, पंचायत समिति सदस्य के 56, सरपंच के 70 एवं जिला परिषद सदस्य की छह सीटें सम्मिलित हैं।

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    207 पुरुष एवं 176 महिलाएं विजेता घोषित हुईं। चुनाव मैदान में 403 पदों के लिए 694 पुरुष एवं 555 महिलाएं भाग्य आजमा रहीं थीं। उल्लेखनीय है कि पंचायत उपचुनाव में 41 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

    ओसीआर से मतगणना बनी पूरी तरह पारदर्शी

    मतगणना में पहली बार पूरी मतगणना प्रक्रिया सौ प्रतिशत ओसीआर (आप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) तकनीक के जरिए संपन्न की गई। यह निर्वाचन आयोग की पारदर्शिता का परिणाम है। राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दीपक प्रसाद ने देश में पहली बार इस तकनीक का उपयोग कर मिशाल कायम की है।

    स्थानीय निकायों के चुनावों में अक्सर मतगणना को लेकर विवाद एवं आपत्तियां देखी जाती रही हैं, लेकिन उपनिर्वाचन 2025 में ओसीआर तकनीक ने इस परिपाटी को तोड़ दिया है। यह पहली बार है मतगणना प्रक्रिया में सौ प्रतिशत परिणामों का निष्पादन ओसीआर तकनीक द्वारा रीयल टाइम में किया गया।

    विशेष रूप से स्थापित हाई रिजोल्यूशन वेबकैम के समक्ष ईवीएम की कंट्रोल यूनिट को रखा गया। कैमरा कंट्रोल यूनिट की स्क्रीन पर प्रदर्शित प्रत्येक अभ्यर्थी को प्राप्त मतों की वीडियो रिकॉर्डिंग करता है। यह रिकॉर्डिंग रीयल टाइम में सुरक्षित सर्वर पर अपलोड होती है।

    इसके बाद, एआई-सक्षम ओसीआर सॉफ्टवेयर रिकार्डिंग से आंकड़ों को पढ़कर पूर्वनिर्धारित प्रपत्र में परिणामों का स्वतः संकलन करता है।

    यह परिणाम पीडीएफ दस्तावेज के रूप में संग्रहित व साझा किया जाता है। पूरी प्रक्रिया बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सम्पन्न हुई। जिससे न केवल त्रुटियां समाप्त हुईं बल्कि प्रत्येक मत का सटीक गणना भी सुनिश्चित की गई।