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बिहार MLC चुनाव 2026: अपनों से मुकाबला, सीटिंग सीट भी गंवाई; कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल

Published: Thu, 29 Oct 2026 09:07 PM (IST)

बिहार विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस अपनी एकमात्र सीटिंग सीट भी नहीं बचा सकी, जिससे उसकी चुनावी रणनीति पर सवाल उठ गए हैं।

बिहार एमएलसी चुनाव: कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल, गंवाई अपनी सीटिंग सीट (फाइल फोटो)

बिहार एमएलसी चुनाव: कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल, गंवाई अपनी सीटिंग सीट (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कांग्रेस ने बिहार एमएलसी चुनाव में एकमात्र सीटिंग सीट गंवाई।

  2. राजद-वामदल से अलग लड़ने की रणनीति कांग्रेस को पड़ी भारी।

  3. कई सीटों पर कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा।

सुनील राज, पटना। बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों (Bihar MLC Election Result 2026) ने कांग्रेस की राजनीतिक हैसियत और चुनावी रणनीति, दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और वामदलों के साथ गठबंधन की जगह अलग राह चुनने तथा कई सीटों पर फ्रेंडली फाइट की रणनीति का पार्टी को कोई फायदा नहीं मिला।

नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस अपनी एकमात्र सीटिंग सीट भी नहीं बचा सकी और उसके वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा को हार का सामना करना पड़ा। दूसरे उम्मीदवार हारे सो अलग से। चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए सिर्फ सीट गंवाने का मामला नहीं हैं, बल्कि राज्य में उसके कमजोर होते जनाधार का भी संकेत हैं।

पार्टी ने जिन सीटों पर अपनी ताकत आजमाई, वहां मतदाताओं का समर्थन जीत में बदलने में नाकाम रहा। इससे सहयोगी दलों के साथ तालमेल, उम्मीदवारों के चयन और संगठन की चुनावी तैयारी पर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है।

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी संजय यादव को महज 21 वोट मिले। यहां पार्टी छठे स्थान पर रही। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी कांग्रेस उम्मीदवार 971 वोट हासिल कर चौथे स्थान पर सिमट गया।

ये आंकड़े बताते हैं कि पार्टी का प्रदर्शन केवल जीत से दूर रहने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई सीटों पर वह प्रभावी मुकाबले की स्थिति भी नहीं बना सकी।

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस को चार हजार से अधिक वोटा मिले। पार्टी यहां पांचवें स्थान पर रही। कोसी स्नातक सीट पर 2297 वोटों के साथ उसे चौथा स्थान मिला।

दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हुए 2977 वोट हासिल किए और दूसरे स्थान पर रही, लेकिन जीत उससे दूर ही रही। राजनीतिक दृष्टि से इन नतीजों ने कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है।

एक ओर उसे अपने संगठन और मतदाता आधार को मजबूत करना होगा, वहीं दूसरी ओर गठबंधन की राजनीति में अपनी रणनीति पर भी विचार करना होगा। फिलहाल, चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया है कि केवल अलग चुनाव लड़ने का फैसला राजनीतिक ताकत का विकल्प नहीं बन सकता।

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