पटना, राज्य ब्यूरो। पौने चार करोड़ जमाबंदी के डिजिटाइजेशन का काम पूरा हो गया है। फिलहाल त्रुटियों का निराकरण किया जा रहा है। उम्मीद की जा रही कि साल के अंत तक यह काम भी हो जाएगा। आनलाइन जमा करने की सुविधा मार्च के बाद बंद है। अभी तक इसे विस्तार नहीं किया गया है। रैयत अंचल कार्यालय में जाकर पुराना लगान आनलाइन जमा करा सकते हैं। एक बार आनलाइन जमा करा देने के बाद इसी प्रक्रिया से आगे भी लगान जमा होता रहेगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अंचलाधिकारियों को कहा है कि जमाबंदी में सुधार के सभी उपाय प्राथमिकता के स्तर पर किए जाएं।

जमाबंदी यानी सरकारी रिकार्ड में जमीन का पासबुक, उसे अपडेट करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अभियान चला रहा है। इसके लिए विभाग में परिमार्जन नाम से एक पोर्टल भी है। इसके जरिए रैयत अपनी जमीन की जरूरी सूचनाएं दर्ज करते हैं। अंचलाधिकारी इसमें सुधार कर देते हैं। इस माध्यम से जमीन के खाता, खेसरा, रकबा के अलावा रैयत के नाम में गड़बड़ी का भी परिमार्जन किया जाता है। एक बार सभी जरूरी आंकड़े जमाबंदी में दर्ज हो जाएं, तो जमीन का सारा कारोबार आनलाइन हो जाएगा।

विभाग ने आठ जून तक का आंकड़ा जारी किया है। जमाबंदी सुधार में सबसे अधिक कामयाबी जहानाबाद जिले को मिली है। करीब 84 फीसद जमाबंदी में आनलाइन लगान जमा हो रहा है। सबसे बुरी हालत सीतामढ़ी जिले की है। इस जिले में सात फीसद से भी कम जमाबंदी का लगान आनलाइन जमा हो पा रहा है। राज्य के स्तर पर करीब 40 फीसद जमाबंदी में हर जरूरी सूचनाएं दर्ज हो चुकी हैं।

तीन करोड़ 78 लाख से अधिक जमाबंदी में से दो करोड़ 29 लाख का लगान नियमित तौर पर जमा हो रहा है। इसमें आनलाइन के अलावा आफलाइन प्रक्रिया का सहारा लिया गया है। एक करोड़ 48 लाख जमाबंदी के लगान का हिसाब नहीं मिल रहा है। 83 लाख ऐसी जमाबंदी है, जिसमें जमीन का रकबा दर्ज नहीं है। विभाग ने अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि फिलहाल आफलाइन लगान जमा करने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद रखें।