राज्य ब्यूरो, पटना: म्यूटेशन से जुड़े मामलों के निबटारे में देरी से परेशान राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इसके लिए समय-सीमा तय कर दिया है। अब अपीलीय प्राधिकार के तौर पर डीसीएलआर (भूमि सुधार उप समाहर्ता) को अधिकतम 30 दिनों के भीतर विवादों का निबटारा करना होगा। बिहार भूमि दाखिल खारिज अधिनियम 2011 में डीसीएलआर के लिए इस अवधि में मामलों का निबटारा करना बाध्यकारी है।  विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने सोमवार को सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि इस आदेश पर तुरंत अमल करें।

सिंह ने अपने पत्र में बिहार भूमि दाखिल खारिज अधिनियम 2011 की विभिन्न धाराओं को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। अधिनियम के मुताबिक म्यूटेशन के मामले में पहली सुनवाई अंचलाधिकारी के यहां होती है। अंचलाधिकारी के निर्णय से कोई पक्ष असंतुष्ट होता है तो वह आदेश की तारीख के 30 दिनों के भीतर डीसीएलआर के कोर्ट में अपील कर सकता है। डीसीएलआर 30 दिनों के भीतर अपना फैसला देंगे। अगर उनके फैसले पर एतराज है तो यह मामला पुनरीक्षण के लिए समाहर्ता या अपर समाहर्ता के पास जाएगा। यहां से आवेदन के निबटारे के लिए भी अधिकतम 30 दिनों का समय निर्धारित है। 

 

बेवजह होती है देरी

अपर मुख्य सचिव के पत्र में स्वीकार किया गया है कि अंचल अधिकारी के आदेश के विरूद्ध डीसीएलआर के स्तर पर दायर अपील वाद का निष्पादन निर्धारित समय पर नहीं किया जा रहा है। किसी-किसी मामले में तो अधिक देर हो जाती है। फिर बिना जायज कारण बताए स्थगन आदेश जारी कर दिया जाता है। सुनवाई की कई तारीख दे दी जाती है। 

अब क्या होगा

पत्र के मुताबिक अब अगर डीसीएलआर किसी मामले में स्थगन आदेश देते हैं। तारीख बढ़ाते हैं तो ऐसा करने के लिए उन्हें युक्तिसंगत कारण बताना पड़ेगा। वे आदेश में उस कारण का भी जिक्र करेंगे। किसी भी हालत में सुनवाई के लिए दो से अधिक तारीख नहीं दी जा सकती है। जिलाधिकारियों को कहा गया है कि वे हर महीने म्यूटेशन मामलों की समीक्षा करें। इसकी जानकारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मुख्यालय को दें। 

Edited By: Akshay Pandey