Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    वादा किया मगर निभाया नहीं, Home Loan के मामले में HDFC Bank को लगा तमाचा; ग्राहक की हुई बल्ले-बल्ले!

    Updated: Thu, 22 Aug 2024 07:05 PM (IST)

    होम लोन के एक केस में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank Home Loan) ने वादा कर ब्याज में रियायत नहीं दी। इस मामले में अब उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाया है। आयोग ने एचडीएफसी बैंक और फाइनांस कॉरपोरेशन दोनों को दोषी माना। निर्णय दिया कि शिकायत की तिथि (11 सितंबर 2007) से छह प्रतिशत ब्याज जोड़ते हुए शंभू को 150000 रुपये वापस किए जाएं।

    Hero Image
    वादा कर ब्याज में रियायत नहीं देने पर एचडीएफसी को लगा तमाचा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

    राज्य ब्यूरो, पटना। HDFC Bank Home Loan हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) लिमिटेड ने पटना के शास्त्रीनगर में रहने वाले शंभू प्रसाद सिंह को होम लोन की पेशकश की। शर्त यह थी कि एचडीएफसी बैंक में उनका बचत खाता कम-से-कम तीन माह पुराना होना चाहिए।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    इसी के साथ उन्हें एक कूपन भी दिया गया, जो ब्याज दर में तीन प्रतिशत की कमी और प्रोसिंसिंग शुल्क से मुक्ति की गारंटी देने वाला था। रियायती त्रण के लिए शंभू एचडीएफसी बैंक की एक्जीविशन रोड शाखा में खाताधारक बन गए। उसके बाद उन्हें 7.31 लाख रुपये का होम लोन मिला, लेकिन ब्याज दर और प्रोसिसिंग शुल्क में कोई राहत नहीं मिली।

    उपभोक्ता आयोग पहुंचा मामला

    आपत्ति करने पर एचडीएफसी प्राधिकार ने ऐसे किसी कूपन से इन्कार कर दिया। यह मामला वर्ष 2007 का है। अंतत: शंभू जिला उपभोक्ता आयोग की शरण में पहुंचे। आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य रजनीश कुमार ने तथ्यों का गंभीरता से अवलोकन किया।

    एचडीएफसी ने किया शर्तों का उल्लंघन

    एचडीएफसी के ब्रोशर में ब्याज में कमी व प्रोसेसिंग शुल्क से छूट का स्पष्ट उल्लेख मिला। ऐसे में स्पष्ट है कि एचडीएफसी ने शर्तों का उल्लंघन किया।

    उल्लेखनीय तथ्य यह है कि शिकायत करने पर ग्राहक को प्रोसेसिंग शुल्क की 50 प्रतिशत राशि वापस भी कर दी गई थी। आयोग ने इसे ग्राहक को संतुष्ट करने का प्रयास माना, लेकिन इस प्रयास में शर्तों का शत प्रतिशत अनुपालन नहीं हुआ।

    आयोग ने ग्राहक के हक में सुनाया फैसला

    अंतत: आयोग ने एचडीएफसी बैंक और फाइनांस कॉरपोरेशन दोनों को दोषी माना। निर्णय दिया कि शिकायत की तिथि (11 सितंबर, 2007) से छह प्रतिशत ब्याज जोड़ते हुए शंभू को 1,50,000 रुपये वापस किए जाएं। पिछले 17 वर्षों से उन्होंने जो मानसिक-शारीरिक पीड़ा झेली है, उसके हर्जाना स्वरूप 40,000 रुपये और कानूनी खर्च के एवज में 10,000 रुपये अतिरिक्त देने हैं।

    ये भी पढ़ें- TRE-1 Exam के परिणाम को लेकर BPSC और नीतीश सरकार से जवाब तलब, पटना HC ने दी डेडलाइन

    ये भी पढ़ें- HDFC Bank ने ग्राहकों को किया सतर्क, फेक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से सावधान रहने की दी सलाह