Rajendra Arlekar: आर्लेकर के बिहार से ट्रांसफर के पीछे KK Pathak? अब सामने आ गई पूरी INSIDE STORY
बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर जल्द ही विदाई लेंगे। उनकी सक्रियता और विश्वविद्यालयों में हस्तक्षेप को उनके जाने का कारण माना जा रहा है। शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव केके पाठक के साथ विवाद भी चर्चा में रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पाठक को हटाकर आर्लेकर को समर्थन दिया था। आर्थिक मामलों में हस्तक्षेप और कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी सवाल उठे।

राज्य ब्यूरो, पटना। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में एनडीए के नेतृत्व के प्रश्न पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी और उसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुप्पी से असहज हुई भाजपा अब क्षतिपूर्ति के प्रयास में जुट गई है। राजभवन में आरिफ मोहम्मद खान की ताजपोशी को भी इसी प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो कदम आगे बढ़कर नीतीश को भारत रत्न देने की वकालत कर रहे हैं।
दस दिन पहले अमित शाह ने मीडिया के एक कार्यक्रम में कहा था कि किसके चेहरे पर बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा जाएगा, यह भाजपा-जदयू और एनडीए के दूसरे घटक दल बैठकर तय करेंगे। किसी मुद्दे पर एनडीए में दरार नहीं है। उनकी टिप्पणी का जदयू ने स्वागत नहीं किया। अंदरूनी तौर पर जदयू ने अप्रसन्नता जाहिर की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुप हो गए। भरपाई का प्रयास उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया।
उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा का चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा, लेकिन चौधरी की घोषणा के अगले दिन जदयू कार्यालय में एक पोस्टर लगाया गया-जब बात बिहार की हो, नाम सिर्फ नीतीश कुमार का हो। राजनीतिक गलियारे में इसे भी जदयू की अप्रसन्नता से जोड़कर देखा गया। मंगलवार को बिहार के राज्यपाल डॉ. राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की जगह केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की नियुक्ति से जदयू खेमा सहज महसूस कर रहा है।
ऐसे तो आर्लेकर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कभी अनबन नहीं हुई। लेकिन, विश्वविद्यालयों के मामले में राज्यपाल की अति सक्रियता शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कभी रास नहीं आई। शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव केके पाठक के साथ राजभवन का विवाद काफी चर्चा में रहा। राजभवन की कई बैठकों में पाठक बुलाने के बाद भी नहीं गए। यही नहीं, कुलपतियों एवं कुलसचिवों का वेतन भी रोक दिया था।
एफआईआर भी कराने के आदेश दिए थे। इसे लेकर राजभवन के साथ-साथ आर्लेकर की भी किरकिरी हुई थी। तब राज्यपाल ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से की थी। अंतत: मुख्यमंत्री ने पाठक को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पद हटा बड़ा संदेश दिया था।
विधानसभा चुनाव में आरिफ होंगे मददगार
नए राज्यपाल के रूप में आरिफ को भेजे जाने के पीछे विश्लेषक मुख्यमंत्री नीतीश से आरिफ की पुरानी दोस्ती के साथ समन्वय की राजनीति से जोड़ रहे हैं। विधानसभा चुनाव 2025 में 225 सीट जीतने के लक्ष्य साधने को लेकर केंद्र सरकार ने एक मुश्त 20 प्रतिशत वोट बैंक को ध्यान में रखकर आरिफ को बिहार भेजा है। आरिफ पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह सरकार में नीतीश कुमार के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल में रह चुके हैं। ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव में आरिफ राजनीतिक समीकरण के लिहाज से भी हितकर प्रमाणित होंगे।
तेजस्वी के रुख में नरमी
यह भी महत्वपूर्ण है कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा हमला नहीं कर रहे हैं। मंगलवार को उनसे नीतीश कुमार की नाराजगी के बारे में प्रश्न पूछा गया, उनका कहना था कि सरकार तो भाजपा चला रही है
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