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बिहार में बाढ़ की त्रासदी बनेगी आर्थिक शक्ति, CM सम्राट ने बताया गंगा-कोसी के मैनेजमेंट का प्लान 

Published: Sat, 31 Oct 2026 02:23 PM (IST)

बिहार सरकार बाढ़ की त्रासदी को आर्थिक शक्ति में बदलने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ...और पढ़ें

जदयू अध्यक्ष संजय झा, सीएम सम्राट चौधरी और उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा। फोटो जागरण

जदयू अध्यक्ष संजय झा, सीएम सम्राट चौधरी और उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा। फोटो जागरण

HighLights

  1. बाढ़ त्रासदी को आर्थिक शक्ति में बदलने का लक्ष्य।

  2. गंगा, कोसी, गंडक नदियों का वैज्ञानिक प्रबंधन होगा।

  3. गाद नीति से मिट्टी उपलब्ध, तटबंधों पर सौर ऊर्जा।

जागरण संवाददाता, पटना। बिहार की सबसे बड़ी कमजोरी मानी जानी वाली बाढ़ की त्रासदी को अब राज्य की सबसे बड़ी ताकत बनाने की दिशा में काम हो रहा है।

राज्य सरकार गंगा, कोसी और गंडक जैसी प्रमुख नदियों को बांधकर, गाद का उचित प्रबंधन कर इसे अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने की कार्ययोजना पर काम कर रही है।

कुछ भी हो, मगर फरक्का समझौते और गंगा जल संधि में बिहार के हकों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। ये बातें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को होटल चाणक्या में 'गंगा जल संधि: बिहार की जल सुरक्षा' विषय पर आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में कहीं।

जल संसाधन विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव और राज्यसभा सदस्य संजय झा ने कलश में जल अर्पित कर किया।

नदी का प्रबंधन करना जरूरी 

मुख्यमंत्री ने जल सुरक्षा को लेकर तैयार की गई एक स्मारिका का विमोचन किया। सीएम ने कहा कि राज्य को पीने के पानी, किसानों के खेतों की सिंचाई और उद्योगों के संचालन के लिए पानी चाहिए।

गंगा के तटबंधों के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि नदी के प्रवाह और उसके प्रबंधन को वैज्ञानिक तरीके से समझना और उसके अनुरूप कार्य करना जरूरी है।

संगोष्ठी में शामिल विशेषज्ञों को गंगा का हवाई सर्वेक्षण कराया जाए, ताकि वे नदी की वास्तविक स्थिति, प्रवाह और गाद जमाव का प्रत्यक्ष आकलन कर सकें तथा प्रभावी सुझाव दे सकें।

गाद प्रबंधन पर बनी नीति

सीएम ने कहा कि सरकार ने गाद प्रबंधन की नई नीति बनाई है। इसके तहत ईंट-भट्ठे वालों और आम जनता को मात्र 10 रुपये में गंगा की मिट्टी उपलब्ध कराए जाने की दिशा में कार्य हो रहा है।

नदियों के तटबंधों का उपयोग ग्रीन एनर्जी के लिए किया जाएगा। 400 किमी लंबी गंगा, 300 किमी से अधिक गंडक और 287 किमी लंबी कोसी नदी के तटबंधों पर फ्लोटिंग सोलर प्लेट लगाने की योजना है, जिससे पानी भी बचेगा और बिजली भी मिलेगी।

उत्तर और दक्षिण बिहार की नदियों के प्रबंधन में अंतर स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर बिहार की नदियों (गंगा, गंडक, कोसी) से गाद निकालने के लिए एनएचएआइ से समझौता किया जा रहा है, लेकिन दक्षिण बिहार की नदियों का समझौता नहीं होगा, क्योंकि वहां की बालू राज्य के लिए राजस्व का मुख्य स्रोत के समान है।

हालांकि, दक्षिण बिहार (गया, नवादा, जमुई, बांका) में भीषण जल संकट है, जहां नदियों को जोड़ने (रिवर लिंकिंग) और टैंकरों से पानी पहुंचाने का काम हो रहा है।

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