बिहार में कम वोटों के अंतर से जीती गई थी 3 दर्जन सीटें, इस बार विधानसभा चुनाव में भी इन पर मचेगा घमासान
बिहार विधानसभा चुनाव में कई सीटें कम अंतर से जीती गईं। हिलसा में सबसे कम 12 वोटों का अंतर था। महागठबंधन की 17 सीटें हैं। दो चुनावों के बीच गठबंधनों में बदलाव हुआ है। रामगढ़ और कुढ़नी में उपचुनाव में सीटें बदल गईं। एनडीए की भी कई सीटें कम अंतर से जीती गईं। अब देखना है 2025 में इन सीटों पर क्या होता है।

राज्य ब्यूरो, पटना। पांच साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में कम अंतर से जीती गई तीन दर्जन से अधिक सीटों पर इसबार भी घमासान के आसार हैं।
ये ऐसी सीटें हैं, जिन पर हार जीत का फैसला तीन हजार के करीब या उससे भी कम वोटों के अंतर से हुआ। इस श्रेणी में महागठबंधन के हिस्से की 17 सीटें हैं। एक निर्दलीय और 19 एनडीए के पास हैं।
सबसे कम 12 वोटों के अंतर से हिलसा में जदयू उम्मीदवार कृष्ण मुरारी शरण की जीत हुई थी। उन्होंने राजद के शक्ति सिंह यादव को पराजित किया था। राजद ने उस समय भी धांधली का आरोप लगाया था। दो चुनावों के बीच गठबंधनों के पार्टनरों के बदलाव से भी अगला चुनाव प्रभावित होगा।
सिमरी बख्तियारपुर में विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी केवल 1759 वोटों के अंतर से चुनाव हारे। राजद के चौधरी युसूफ सलाउद्दीन ने उन्हें पराजित किया था।
इसी तरह सुगौली में राजद के शशिभूषण सिंह ने विकासशील इंसान पार्टी के रामचंद्र सहनी को 3447 वोटों के अंतर से पराजित किया।अब विकासशील इंसान पार्टी और राजद में दोस्ती है। दूसरे नम्बर की इन सीटों के लिए मुकेश सहनी राजद पर निर्भर हो गए हैं।
कम वोटों के अंतर से जीतने वाली महागठबंधन की अन्य सीटें हैं:
- सिकटा- वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता- भाकपा माले- 2302
- कल्याणपुर- मनोज कुमार यादव- राजद -1197
- बाजपट्टी, मुकेश यादव- राजद- 2704
- किशनगंज- इजरारूल हक- कांग्रेस-1381
- बखरी- सूर्यकांत पासवान-भाकपा -777
- खगड़िया- छत्रपति सिंह यादव- कांग्रेस- 3000
- राजापाकर- प्रतिमा दास-कांग्रेस 1746
- भागलपुर- अजित शर्मा- कांग्रेस-1113
- डेहरी आन सोन- फतेह बहादुर कुशवाहा- राजद -464
- औरंगाबाद- आनंद शंकर सिंह- कांग्रेस-2243
- अलौली- रामवृक्ष सदा- राजद- 2773
- महाराजगंज- विजय शंकर दुबे- कांग्रेस-1976
- सिवान- अवध बिहारी चौधरी- राजद-1973
दरभंगा ग्रामीण से राजद के ललित कुमार यादव की जीत 2141 वोटों के अंतर से हुई थी। उस समय के जदयू उम्मीदवार डॉ. फराज फातमी अब राजद में हैं। राजद उन्हें दरभंगा जिले की किसी अन्य सीट से उम्मीदवार बनाएगा। रामगढ़ का हिसाब हो गया है।
वहां राजद के सुधाकर सिंह 189 वोटों के अंतर से जीते थे। वे लोकसभा के लिए चुन लिए गए। उप चुनाव में भाजपा के हिस्से में यह सीट आ गई।
रामगढ़ की तरह कुड़हनी विधानसभा की सीट भी उप चुनाव में राजद के हाथ से निकल गई। 2020 में राजद के डा. अनिल सहनी 712 वोटों से जीते थे। कानूनी प्रक्रिया में उनकी सदस्यता समाप्त हुई। उप चुनाव हुआ तो भाजपा के केदार प्रसाद गुप्ता जीत गए।
एनडीए की सीटें और वोटों का अंतर
- परिहार- गायत्री देवी- भाजपा-1569
- रानीगंज- अचमित सदा- जदयू-2304
- प्राणपुर- निशा सिंह- भाजपा-2972
- अलीनगर- मिश्रीलाल यादव- भाजपा-3101
- बहादुरपुर- मदन सहनी- जदयू-2629
- सकरा- अशोक चौधरी- जदयू-1537
- भोरे- सुनील कुमार-जदयू-462
- हाजीपुर- अवधेश सिंह-भाजपा-2990
- बछवाड़ा- सुरेश मेहता-भाजपा-484
- परवत्ता- संजीव कुमार- जदयू-951
- मुंगेर- प्रणव कुमार दास-भाजपा-1244
- बरबीघा-सुदर्शन कुमार-जदयू-113
- आरा-अमरेंद्र प्रताप सिंह-भाजपा-3002
- टिकारी-अनिल कुमार-हम-2630
- झाझा-दामोदर राऊत-जदयू-1679।
मटिहानी से लोजपा राजकुमार सिंह-333 वोटों के अंतर से जीते थे। दूसरे नम्बर पर जदयू के नरेंद्र कुमार सिंह थे। राज कुमार सिंह अभी जदयू में हैं।नरेंद्र कुमार सिंह राजद में शामिल हो गए।
चकाई से सुमित कुमार सिंह ने निर्दलीय की हैसियत से राजद की सावित्री देवी को 581 वोटों के अंतर से पराजित किया था। सुमित ने नीतीश कुमार की सरकार का समर्थन किया। अभी मंत्री हैं।
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