गीतों के जरिए कलाकारों ने बयां की मिथिला की लोक संस्कृति
जय-जय भैरवि असुर भयाउनि पशुपति भामिनी माया.. जग में सुंदर मिथिला धाम.. जैसे गीतों से शुरू हुआ कार्यक्रम
पटना। 'जय-जय भैरवि असुर भयाउनि पशुपति भामिनी माया..', 'जग में सुंदर मिथिला धाम..' जैसे एक से बढ़कर एक विद्यापति रचित गीतों की प्रस्तुति कलाकार सभागार में कर रहे थे। सभागार में बैठे मिथिला वासियों ने गीतों का भरपूर आनंद उठाने में लगे थे। मिथिला संस्कृति विकास समिति के तत्वावधान में दो दिवसीय विद्यापति स्मृति पर्व समारोह का आयोजन राजीव नगर रोड नम्बर चार के रॉयल गार्डन में किया गया। स्मृति पर्व के दौरान समिति के अध्यक्ष लालटूना झा ने कहा कि समिति की ओर से 22वां विद्यापति स्मृति पर्व मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्व का मुख्य उद्देश्य मिथिला की लोक संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि महाकवि विद्यापति मध्ययुग में मैथिली भाषा के कवि रहे। उन्होंने 14वीं-15वीं सदी में अपनी रचनाओं में सामाजिक कुरीतियों का वर्णन अपनी रचनाओं में किया, जो आज भी प्रासंगिक है। मैथिली की लोक संस्कृति को विकसित करने में विभिन्न संस्थाएं अपने स्तर से देश और विदेशों में काम कर रही हैं। समारोह के दौरान समिति की ओर से साहित्यकार पंडित सुधांशु शेखर चौधरी को 'शेखर सम्मान' से सम्मानित किया गया। समिति के अध्यक्ष ने कहा कि सुधांशु शेखर मैथिली साहित्य को समृद्ध करने में अपना योगदान देते रहे हैं। मैथिली और हिदी में शेखर ने कई नाटक भी लिखे, जो आज भी मंचित किए जाते रहे हैं। साहित्य अकादमी पुरस्कार, नई दिल्ली, साहित्याचार्य पुरस्कार, हिदी साहित्य परिषद नागपुर, चेतना समिति की ओर से भी उन्हें पुरस्कृत किया गया है। समारोह के दौरान विधायक नितिन नवीन, पीआरडी निदेशक प्रदीप कुमार झा ने मिथिला की लोक संस्कृति और इसकी महत्ता पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। निदेशक प्रदीप झा ने कहा कि विकास समिति विद्यापति स्मृति पर्व के बहाने लोगों में मिथिला की लोक संस्कृति से लोगों को रूबरू होने का मौका मिल रहा है ।
गीत संगीत से गुलजार हुआ परिसर -
विद्यापति स्मृति पर्व के पहले दिन कलाकारों ने एक से बढ़कर एक गीत और नृत्य की प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीता। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत गायक गौरव झा ने गोसउनि गीत 'जय-जय भैरवि असुर भयाउनि पशुपति भामिनी माया' से की। वही गायिका जूली झा ने विद्यापति गीत ' अरे-अरे भवरा' व मिथिला का वर्णन ' जग में जग पहिले उग सूरज देवा, मोरे पिया भइले लकहरवा हो को पेश कर तालियां खूब बटोरीं। वही सलोनी मल्लिक ने भाव नृत्य 'जय-जय भैरवि असुर भयाउनि' गीत पर दी। वही मल्लिक ने 'सखी की पूछे सी अनुभव मोर विद्यापति गीत को पेश कर समारोह में समां बांध दिया। जैसे-जैसे समय आगे की ओर बढ़ता जा रहा था परिसर में एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति हो रही थी। वही दीप्ति कश्यप ने विद्यापति गीत 'मोरा रे अंगनवा' एवं 'स्वर्ग से सुंदर मिथिला धाम गीत पर वाहवाही खूब लूटी। वही युवा गायक माधव राय ने ' उगना रे मोर कतेक गेल एवं सबसे सुंदर मिथिला धाम गीतों पर लोगों को आनंदित किया। संगत कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से गीतों को जीवंत बनाया। संगत कलाकारों में ढोलक पर अमरनाथ, पैड पर रजनीश कुमार, तबला पर राजशेखर, बैंजो पर अशोक एवं आर्गन पर मनीष कुमार ने प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीता। मौके पर समिति के उपाध्यक्ष दशरथ मिश्र, दिलीप कुमार, महासचिव संजीव कुमार झा, सुशील राय, कुमुद रंजन मिश्र, धर्मेश झा, संतोष कुमार चौधरी, रामविलास आचार्य, अजय कृष्ण मिश्र, महेंद्र मिश्र, मीडिया प्रभारी सौरव झा मौजूद थे। मंच का संचालन माधव राय ने किया।
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