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    सामाजिक-आर्थिक रिपोर्ट पेश करने के बाद बोले संसदीय कार्य मंत्री- जाति आधारित गणना CM नीतीश की मौलिक कल्पना

    By Arun AsheshEdited By: Prateek Jain
    Updated: Tue, 07 Nov 2023 11:48 PM (IST)

    Bihar News संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने जाति आधारित गणना की सफलता के लिए सत्तारूढ़ सहयोगी दलों के साथ विपक्ष के प्रति भी आभार व्यक्त किया। मंगलवार को विधानसभा में गणना से जुड़ी आर्थिक और सामाजिक रिपोर्ट पेश करने के बाद चौधरी ने विपक्षी भाजपा बेंच की ओर देख कर कहा कि आपके सहयोग से सरकार को यह उपलब्धि हासिल हुई है।

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    सामाजिक-आर्थिक रिपोर्ट पेश करने के बाद बोले संसदीय कार्य मंत्री- जाति आधारित गणना CM की मौलिक कल्पना है। (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो, पटना। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने जाति आधारित गणना की सफलता के लिए सत्तारूढ़ सहयोगी दलों के साथ विपक्ष के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

    मंगलवार को विधानसभा में गणना से जुड़ी आर्थिक और सामाजिक रिपोर्ट पेश करने के बाद चौधरी ने विपक्षी भाजपा बेंच की ओर देख कर कहा-आपके सहयोग से सरकार को यह उपलब्धि हासिल हुई है।

    गणना की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई: विजय कुमार चौधरी

    उन्होंने कहा कि गणना की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद रैंडम तरीके से नमूने की जांच की गई। सब सही पाया गया। यह दस्तावेज के सही होने का प्रमाण है कि गरीबों का जो आंकड़ा नीति आयोग ने तैयार किया था, वह जाति आधारित गणना के आंकड़ों से मिलता है।

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    उन्होंने गणना के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशंसा की। कहा कि यह मुख्यमंत्री की मौलिक कल्पना है, जिसकी गूंज पूरे देश में है। गणना में दी गई जानकारी स्वघोषित है।

    चौधरी ने कहा कि सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण का यह दस्तावेज आने वाले दिनों में शोध के लिए संदर्भ का काम करेगा। इससे पहले जातियों और गरीबों का कोई प्रामाणिक आंकड़ा नहीं था। इसके आधार पर सरकार गरीबों के कल्याण के लिए योजना बनाएगी।

    'किसी जाति की संख्या कम या अधिक होना उपलब्धि या विफलता का प्रमाण नहीं'

    किसी जाति की संख्या कम या अधिक होना उपलब्धि या विफलता का प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि साक्षरता दर में वृद्धि हुई है। लिंगानुपात में सुधार हुआ है। 2011 में साक्षरता दर 61.8 प्रतिशत थी। अब बढ़कर 79.9 प्रतिशत हो गई है।

    2011 में प्रति हजार पुरुष की तुलना में महिलाओं संख्या 918 थी। बढ़कर 953 हो गई है। यह बड़ी उपलब्धि है। मंत्री ने कहा कि गणना रोकने के बहुत प्रयास किए गए।

    पटना हाई कोर्ट की ओर से एकबार इस पर रोक भी लगा दी गई थी। बाद में न्यायालय ने प्रक्रिया को सही माना। निजता के उल्लंघन का सवाल उठाया गया था। न्यायालय ने इसे स्वीकार नहीं किया।

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