पटना, राज्य ब्यूरो। अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के छह जदयू (JDU MLAs) विधायकों के भाजपा (BJP) में शामिल होने के बाद दोनों दलों के बीच की तल्खी खत्म भी नहीं हुई है कि इनके बीच विवाद का नया मोर्चा खुल गया है। फर्क सिर्फ यह है कि अरुणाचल में भाजपा है तो नए मोर्चे के एक सिरे पर पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) खड़ा हुआ। विवाद का विषय है: बिहार में लव जिहाद रोकने के लिए उत्तर प्रदेश जैसा कानून बने, या न बने। संघ की इस मांग को जदयू के महासचिव केसी त्यागी (K C Tyagi) ने एक झटके में खारिज कर दिया है। संघ की मांग को भाजपा से भी समर्थन मिलने लगा है। विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल (BJP MLA Haribhushan Thakur) ने कहा कि मांग वाजिब है। बिहार सरकार जल्द इस दिशा में पहल करे।  

नया कानून बनाने की मांग कहां से उठी

शुक्रवार को पटना में हिन्दू जागरण मंच (Hindu Jagran Manch) के कार्यकर्ताओं का सम्मेलन था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक और इस मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री (बिहार-झारखंड) डाॅ. सुमन संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा-लव जिहाद के खिलाफ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार कानून बना चुकी है। इसी तर्ज पर अब बिहार में भी कड़ा कानून बनाने की जरूरत है।

बिस्‍फी के भाजपा विधायक ने किया समर्थन

भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई ने अबतक आधिकारिक तौर पर संघ की इस मांग का समर्थन नहीं किया है। लेकिन, पार्टी के विधायकों के बीच इसकी चर्चा होने लगी है। मधुबनी जिला के बिस्फी विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने कहा-यह बेहद जरूरी मांग है। बिहार सरकार जल्द से जल्द लव जिहाद रोकने के लिए कानून बनाए। हम नेतृत्व से मांग करते हैं कि वह इसके लिए राज्य सरकार से बातचीत करे। ठाकुर ने एक कदम आगे बढ़ कर कहा कि लव जिहाद (Love Jihad) रोकने के साथ-साथ जनसंख्या नियंत्रण (Population Cantrol Act) के लिए भी कानून बने। ये दोनों कानून नहीं बने तो अगले 30 वर्षों में देश में हिंदू ही अल्पसंख्यक हो जाएंगे।

जदयू ने किया ऐसी किसी मांग का कड़ा विरोध

जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि बिहार में क्या इस देश के किसी राज्य में इस तरह का कानून बनाने की कोई जरूरत नहीं है। बिहार में ऐसी घटनाओं का कोई उदाहरण नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी बालिक को पसंद से शादी करने का अधिकार है। हम समाजवादी लोग हर हाल में जाति और धर्म के नाम पर विभेद करने और मत विशेष को थोपने वाले कानून का समर्थन नहीं कर सकते हैं।

Edited By: Shubh Narayan Pathak