सभी भक्तों की मुरादें पूरी करती हैं मां तारा देवी
संसू नरहट नवादा जिले के नरहट प्रखंड के बेरौटा गांव स्थित प्रसिद्ध एवं ऐतिह
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संसू, नरहट : नवादा जिले के नरहट प्रखंड के बेरौटा गांव स्थित प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक मां तारा देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र पर माता का दर्शन व पूजन के लिए प्रति दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त माता का दर्शन पूजन कर आशीर्वाद ले रहे हैं। यहां के प्रति लोगों में असीम आस्था है। मान्यता है कि नवरात्र में माता का दर्शन पूजन कर मन्नतें मांगने पर मां भक्तों की सभी मुरादें पूरी करती हैं। नि:संतान महिलाएं माता का पूजन कर आंचल फैलाकर पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद मांगती है। मुरादें पूरी होने पर भक्त मां तारा देवी की गोद भराई व पूजा अर्चना ढोल बाजे के साथ करते हैं। कोरोना को लेकर मंदिर के पुजारी एवं मंदिर कमेटी द्वारा सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन कराया जा रहा है।
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मां तारा देवी मंदिर का इतिहास
- ग्रामीणों के अनुसार बेरौटा गांव वर्षों पूर्व राजा विराट की नगरी थी। राजा विराट का महल बेरौटा गांव में था। आज भी कुछ लोग बेरौटा गांव को विराटनगर कहते हैं। पूर्व में माता तारा देवी की प्रतिमा एक विशाल पीपल के वृक्ष के खोहनुमा में अवस्थित था। पीपल का पेड़ काफी पुराना होने के कारण धीरे धीरे धराशायी हो गया। इसके बाद ग्रामीणों एवं अन्य आस पास के दानदाताओं के सहयोग से उसी स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण कार्य जारी है। बताया जाता है कि राजा विराट की पुत्री उतरा इस मंदिर में मां तारा देवी की पूजा अर्चना किया करती थी। मंदिर के ठीक सामने 100 गज की दूरी पर खुले आसमान में करीब 7 फीट का एक विशाल शिवलिग है। मंदिर के उत्तर 50 गज की दूरी पर एक तालाब है। मंदिर परिसर में एक षष्ट कोण का कुआ मंदिर की पौराणिकता को दर्शाता है।
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ग्रामीणों की मांग
-ग्रामीणों का कहना है कि बेरौटा गांव स्थित मां तारा देवी का मंदिर काफी पुराना है। पुरात्व विभाग की टीम द्वारा भी मंदिर की जांच की गई है। इस ऐतिहासिक मंदिर को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किए जाने की जरूरत है। समीप के झिकरुआ सूर्य नारायण मंदिर को पर्यटक स्थल में शामिल किया गया है, तब से ग्रामीणों की मांग बेरौटा गांव स्थित तारा देवी मंदिर को भी पर्यटक स्थल में शामिल करने के लिए तेज हो गई है।
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क्या कहते हैं पुजारी
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मंदिर के पुजारी रंजीत पांडेय ने बताया कि मां तारा देवी की महिमा अपरंपार है। सच्चे मन से जो भी भक्त माता दर्शन पूजन कर मन्नतें मांगते हैं, माता उनकी सभी मुरादें पूरी करती हैं। मन्नतें पूरी होने पर गाजे बाजे के साथ मुंडन संस्कार, गोद भराई का रस्म एवं नवरात्रि पूजा करते हैं। ऐसे तो दूर दूर से श्रद्धालु भक्त प्रति दिन माता का दर्शन के लिए आते हैं लेकिन नवरात्र में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।
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