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    बुलावा आया तो 786वां राम कथा पाकिस्तान में करूंगा : मोरारी बापू

    By Edited By:
    Updated: Sun, 27 Mar 2016 03:01 AM (IST)

    नालंदा। मेरा मनोरथ और अनहद इच्छा है कि पाकिस्तान में मेरा 786वीं राम कथा जिसका विषय मानस

    नालंदा। मेरा मनोरथ और अनहद इच्छा है कि पाकिस्तान में मेरा 786वीं राम कथा जिसका विषय मानस मोहब्बत होगा। ऐसी राम कथा पाकिस्तान की धरती पर करके मैं पैगाम-ए- मोहब्बत देना चाहूंगा। क्योंकि इस्लाम धर्म में खुदा को अली, मौला को 786 अंक के रूप में उनकी इबादत की जाती है। उक्त बातें विश्व प्रसिद्ध राम कथा वाचक मोरारी बापू ने वीरायतन स्थित राम कुटिया में शनिवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान कई सवालों का जवाब देते हुए कहा कि देश के अलावे विदेशों में भी राम कथा सुनायी है। यह मेरा 771वां राम कथा है। अगर मुझे पाकिस्तान बुलाएगा तो 786वां राम कथा पाकिस्तान में करूंगा। उन्होंने कहा कि मैंने अपना राम कथा कि शुरुआत 14 वर्ष के उम्र में अपने गांव में सावन माह में किया था। चार-पांच कथा मैं गांव में ही किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गोमुख से निकलकर गंगा नदी का रूप धारण कर गंगा सागर के रूप में परिवर्तित हो जाती है। उसी प्रकार मेरा राम कथा एक छोटे से स्वरूप से शुरू होकर आज विशाल जनमानसों के मन में बस चुका है। उन्होंने कहा कि कई ऐसे लोग भी हैं, जो हमारे राम कथा को सुन नहीं पाते परन्तु उनके लिए मेरे राम कथा का निचोड़ और सार पांच सबक के रूप में प्रस्तुत है। सत्य, प्रेम, करूणा, मौन व स्वध्याय। उन्होंने इन पांचों सबक के परिभाषित करते हुए कहा कि सत्य निर्भयता का, प्रेम त्याग का, करूणा अ¨हसा का मौन अपने आंतरिक पुरुषार्थ की शक्ति का तथा स्वध्याय धर्मों की साधना है। जो हमारे राम कथा के उक्त पांच सारांश को आत्मसात कर लेता है। वो प्रभु राम के करीब चला जाता है। उन्होंने कहा कि सत्य के पक्ष में मेरा कहना है कि सत्य शाश्वत हो ना कि प्रिय सत्य हो। सत्य अमृत है उसे जहर नहीं बनाया जाय। एक सवाल के जवाब में उन्होंने दुनिया में इतने अस्पताल हैं फिर भी बिमारियां है। ठीक उसी प्रकार आतंक, भय, पीड़ा व अ¨हसा से ग्रस्त दुनिया को उधार करने बुद्ध महावीर, विवेकानंद, गांधी जैसे महापुरुष पैदा लेते रहते हैं। जिन्होंने मानव कल्याण के लिए वेद, धम्म पद राम कथा की रचना किए और अंत में उन्होंने कहा कि हर घर रावण इतने राम कहां से लाउ के सवाल पर उन्होंने कहा कि राम हर मन में हर घाट व कण-कण में है। जरूरत है तो सच्चे मन से उन्हें पुकारने की और वे आपके मन में प्रकट हो जाएंगे। इस अवसर पर आचार्य श्री चंदना जी महाराज, राम कथा आयोजक चिमन लाल दोषी, चिराग दोषी, साध्वी संप्रज्ञा जी महाराज, मंगला जी महाराज, वीरायतन प्रबंधक अंजनी ¨सह, राम स्वयं सेवक अनिल स्वामी, सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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