मधुबनी [जेएनएन]। आश्विन की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा मिथिला के लिए खास है। इस दिन विशेष पर्व कोजागरा मनाया जाता है। यह गुरुवार को है। इसे लेकर उत्साह का माहौल है। चांदनी रात में नवविवाहितों के यहां जश्न का माहौल रहेगा। लोगों में मखाना व पान बांटने के साथ ही कई पारंपरिक आयोजन होंगे। मिथिला की लोक संस्कृति में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

कोजागरा शरद पूर्णिमा की रात में आयोजित की जाती है। प्रतिवर्ष आश्विन माघ की पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता है। मिथिलांचल के लिए महाउत्सव जैसा होता है। इस दिन नवविवाहित वर के यहां कन्या के घर से आए मखाना व पान को बांटने की परंपरा है।

वर के ससुराल से जब सारी सामग्री आ जाती है तो गांव या समाज को आने का न्योता दिया जाता है। वर को ससुराल से आए वस्त्र पहनाए जाते हैं। घर की महिलाएं आंगन में अष्टदल कमल का अरिपन देती हैं। इस पर चुमाओन का डाला रख वर के चुमाओन की विधि पूरी की जाती है।

इसके बाद वर साला या भावज के साथ चांदी की कौड़ी से पचीसी खेलता है। इस दौरान महिलाओं का हास-परिहास का दृश्य चलता रहता है। इस अवसर पर वर के सिर पर छाता तान दिया जाता है। उसी समय पांच ब्राह्मण दुर्वाक्षत देकर आशीर्वाद देते हैं। कहीं-कहीं मैथिली गीत-संगीत की भी महफिल सजती है।

डाला की विशिष्टता
वैसे तो मिथिला में विवाह के अवसर पर डाला सजाकर ही चुमाओन किया जाता है, लेकिन कोजागरा का डाला प्रसिद्ध है। इस अवसर पर लगभग पांच से छह फुट व्यास वाले बांस से बने डाला पर धान, मखाना, पांच नारियल, पांच हत्था केला, छाछ, पान की ढोली, मखाना की माला, जनेऊ, सुपारी, इलायची और अड़ांची से सजा कलात्मक वृक्ष, पांच प्रकार की मिठाई की थाली, छाता, छड़ी व वस्त्र सहित अन्य सामग्रियों की सजावट देखते ही बनती है। इसी डाला से वर का चुमाओन करने की परंपरा है। बड़ा डाला रहने से इसे 10-10 की संख्या तक महिलाएं उठाकर चुमाओन की विधि संपन्न करती हैं।

मखाना व बतासा के दाम ऊंचाई पर

कोजागरा को लेकर मखाना व बतासा के दाम ऊंचाई की ओर हैं। मखाना की विशिष्टता बोरी से की जाती है। 12 किलो की बोरी वाला मखाना 250 रुपये किलो है। 10 किलो का 270 व आठ किलो बोरी वाले मखाना की कीमत 300 से 350 रुपये प्रति किलो है। वहीं सामान्य दिनों में 100 रुपये में बिकने वाले बतासा की कीमत 200 रुपये प्रति किलो है।

Edited By: Ravi Ranjan