'दुनिया आज युवा भारत की ओर देख रही, यह हमारी ताकत', मुजफ्फरपुर में बोले उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि भारत की युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी ताकत है, जिससे दुनिया भारत की ओर देख रही है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर दिया। धनखड़ ने भारत की 5000 साल पुरानी संस्कृति और आर्थिक प्रगति की सराहना की, जिसमें भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।

संगोष्ठी को संबोधित करते उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़। जागरण
प्रेम शंकर मिश्रा, मुजफ्फरपुर। देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि दुनिया आज भारत की ओर देख रही है, यह इसलिए कि यहां सबसे अधिक युवा आबादी है। भारतीयों की औसत आयु 28 वर्ष की तुलना में चीन 10 साल अधिक है। यह हमारी ताकत है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति इस ताकत को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त कर रही है।
उपराष्ट्रपति मंगलवार को यहां ललित नारायण मिश्रा बिजनेस मैनेजमेंट कॉलेज के स्थापना दिवस पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, हमारी पांच हजार साल की संस्कृति है। यह हमारा इतिहास है। अन्य देशों में कोई दो सौ तो कोई पांच सौ साल का है। भारत बेमिसाल है। भारतीयता हमारी पहचान, राष्ट्रवाद धर्म और राष्ट्र सर्वाेपरि हमारा संकल्प है। वैदिक सिद्धांत में कहा गया है, सा विद्या या विमुक्तये। ज्ञान का अर्थ मुक्ति का मार्ग है। हमारी परंपरा स्पष्टवादिता को बढ़ावा देती है। हमारे देश में शिक्षा हमेशा वैल्यू बेस्ट रही है। किसी भी कालखंड में शिक्षा का व्यावसायीकरण हुआ ना इसे उत्पाद बनाया गया।
भारत ने एक दशक में लगाई लंबी छलांग:
उपराष्ट्रपति ने कहा, दस वर्ष की यात्रा को देखेंगे तो भारत ने बड़ी छलांग लगाई है। आर्थिकी क्षेत्र की आधारभूत संरचना में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। हम विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं। वह दिन भी दूर नहीं जब हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। दुनिया के स्तर पर भारत सबसे बड़ी छलांग लगाने वाला राष्ट्र है। सर्वाधिक आकांक्षाओं को पूरा करने वाला देश है। आपकी आकांक्षा पूरा करने के लिए अनेक विकल्प हैं, जो पहले नहीं थे।
श्रेष्ठ मापदंड के साथ आतंकवाद को दिया जवाब:
भारत ने पहलगाम का जवाब श्रेष्ठ मापदंड के आधार पर दिया। जिनको सबक सिखानी थी उसे सही तरीके से सिखाया। आतंकवादियों के ठिकाने पर सीधा आक्रमण किया। सीमा के पार उनके सबसे बड़े प्रांत के बीच में प्रहार किया। जब कब्रिस्तान में शव को ले जाया जा रहा था तो वहां आतंकवादी, सेना और नेता भी थे। किसी ने कोई सुबूत नहीं मांगा। मगर सुबूत दुश्मन ने ही दे दिया। एक लक्ष्य गांधी की भूमि है। एक लक्ष्य शांति के दूत हैं। शांति का कोई विकल्प नहीं है। पीएम ने शतरंज के खेल में अपनी गोटियां का जबरदस्त उपयोग किया। सबक भी सिखा दिया और आपरेशन को भी समाप्त नहीं किया। संदेश दे दिया, अब बर्दाश्त नहीं करेंगे। जवाब कैसा देंगे यह मिल गया। बौद्ध और गांधी की भूमि कभी स्वीकार नहीं करेगी कि हिंसा हो।
बिहार की भूमि प्रेरणादायी:
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बार-बार बिहार की भूमि को महान बताया। कहा, यह भूमि प्रेरणा का स्रोत है। यहां बौद्ध और जैन धर्म पनपा। बुद्ध ने यहां ज्ञान की प्राप्ति की। बिहार दर्शन की नींव है।आजादी के बात करूं तो चंपारण सत्याग्रह। बिहार की भूमि पर हुआ। महात्मा गांधी ने पहला सत्याग्रह आंदोलन किया।किसान की समस्या को राष्ट्र का आंदोलन बना दिया। सोमनाथ मंदिर की बात करें तो भी यह धरती याद आती है। सरदार बल्लभ भाई ने नया रूप देने में बड़ी भूमिका निभाई। डा. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का जीर्णाद्धार किया। कुछ लोगों ने आपत्ति की, मगर बिहार का सपूत डटा रहा। इसी धरती से आपातकाल के खिलाफ लोकनायक ने संपूर्ण क्रांति का शंखनाद किया।
उन्होंने खुद को यह कहते हुए भाग्यशाली बताया कि जननायक कर्पूरी ठाकुर को जब भारत रत्न दिया वह राज्यसभा के उपसभापति के रूप में वहां रहे।इससे पहले उपराष्ट्रपति ने यहां एक पौधा मां के नाम लगाया। उनका स्वागत राज्य के उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने किया। इस दौरान राज्य के पंचायती राज मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति डा. डीसी राय आदि मौजूद थे।
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