जन जीवन पर दुष्प्रभाव डाल रहा प्लास्टिक
प्लास्टिक के बैग का इस्तेमाल हर छोटे-बड़े सामान को रखने के लिए किया जाता रहा है। ग्राहकों की पहली पसंद रहा है प्लास्टिक का बैग, जो हल्का और सस्ता होने के साथ-साथ काफी मजबूत भी होता है।
मुजफ्फरपुर। प्लास्टिक के बैग का इस्तेमाल हर छोटे-बड़े सामान को रखने के लिए किया जाता रहा है। ग्राहकों की पहली पसंद रहा है प्लास्टिक का बैग, जो हल्का और सस्ता होने के साथ-साथ काफी मजबूत भी होता है। इसी वजह से प्लास्टिक बैग पर कई बार रोक लगायी जाने के बाद भी, चलन बंद नही है। बगहा दो प्रखंड के सिर्फ हरनाटांड़ सहित थरुहट क्षेत्र में करीब लाखों प्लास्टिक के बैग और पॉलीथिन काम में लिए जाते हैं। ऐसे में इनसे होने वाले नुकसान का अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।
प्लास्टिक जमीन, हवा और पानी सबको दूषित कर रहे हैं। जमीन में प्लास्टिक के मिलने से जमीन की उर्वरता नष्ट हो रही है और पानी में मिलकर प्लास्टिक अंडरग्राउंड वाटर को दूषित और जहरीला बना रहे हैं। इतना ही नहीं, प्लास्टिक को जलाने पर जो जहरीली गैसें निकलती हैं। उन्होंने हवा को भी प्रदूषित और जहरीला बना दिया है। प्लास्टिक के बैग नॉन बायोडिग्रेडेबल होते हैं। यानी ये प्राकृतिक रूप से विघटित नहीं होते और इन्हें विघटित होकर खत्म होने में लगभग हजार साल का लम्बा समय लग जाता है। ऐसे में पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंच रहा होगा, ये आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं।
प्लास्टिक बना जानवरों की मौत का कारण प्लास्टिक से होने वाले नुकसान से जानवर भी अछूते नहीं हैं। खाने की चीजों के साथ प्लास्टिक बैग भी निगल लेने के कारण बहुत से जानवर मर जाते हैं। उल्लेखनीय है कि गाय के अलावा डॉल्फिन्स, व्हेल्स, पेंगुइन्स और कछुए जैसे कई जीवों की मौत प्लास्टिक बैग के कारण होती है।
सुनैना स्मृति सेवा संस्थान, हरनाटांड़ के चिकित्सक डॉ. कृष्णमोहन राय के अनुसार सिर्फ पन्नी ही नहीं, बल्कि रिसाइकिल किए गए रंगीन या सफेद प्लास्टिक के जार, कप या इस तरह के किसी भी उत्पाद में खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ का सेवन स्वास्थ्य के लिए घातक सिध्द हो सकता है। इनमें मौजूद बिसफिनोल ए नामक जहरीला पदार्थ बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक है। प्लास्टिक के घातक तत्वों के खाद्य पदार्थों एवं पेय पदार्थों के माध्यम से शरीर में पहुंचने से मस्तिष्क का विकास बाधित होता है। इसका बच्चों की स्मरण शक्ति पर सर्वाधिक विपरीत असर पड़ता है। बिसफिनोल ए शरीर में हार्मोन बनने की प्रक्रिया और उनके स्तर को भी प्रभावित करता है। इससे प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। पर्यावरणविद का विचार . पर्यावरणविद सह पर्यावरण पुरुष गजेंद्र यादव कहते हैं कि प्लास्टिक से होने वाले पर्यावरण को नुकसान को कम करने की दिशा में हर एक इंसान कुछ बेहद जरूरी कदम उठा सकता है। सतर्कता और जागरूकता दो बेहद जरूरी चीजें हैं जिनसे प्लास्टिक के खिलाफ अपनाया जा सकता है। प्लास्टिक से होने वाले नुकसान की जानकारी अपने आप में नाकाफी है। जब तक इसके नुकसान जानने के बाद ठोस कदम न उठाए जाएं। सरकार और पर्यावरण संस्थाओं के अलावा भी हर एक नागरिक की पर्यावरण के प्रति कुछ खास जिम्मेदारियां हैं। जिन्हें अगर समझ लिया जाए तो पर्यावरण को होने वाली हानि को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। खुद पर नियंत्रण इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है। इसके अलावे पर्यावरण के मद्देनजर हर एक व्यक्ति को पौधरोपण करना भी नितांत आवश्यक है। इससे ग्लोबल वार्मिंग की खतरा से बचा जा सकता है।
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