मजफ्फरपुर, अमरेंद्र तिवारी। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर (एनआरसीएल) लीची उत्पादक किसानों को बाग प्रबंधन सिखाएगा। पहले चरण में मुजफ्फरपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर के अलावा सूबे के अन्य जिलों के किसानों को जोड़ा जाएगा। इसके बाद उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मिजोरम व नगालैंड के किसान जुड़ेंगे।20 जून तक लीची की फसल खत्म होने के बाद प्रशिक्षण सत्र शुरू होगा। इसमें विज्ञानी मृदा से लेकर पेड़ों की सुरक्षा चक्र पर अलग-अलग मौसम के अनुसार जानकारी देंगे। कोरोना के चलते कार्यक्रम वर्चुअल होगा। स्थिति सामान्य होने पर किसान एनआरसीएल आकर जानकारी ले सकेंगे।

गुणवत्ता के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने की चुनौती

मुजफ्फरपुर की शाही लीची की डिमांड कई शहरों में बढ़ी है। इस बार लंदन में कई खेप भेजी गई। ऐसे में फल की गुणवत्ता के साथ उत्पादन बढ़ाने की योजना है। एनआरसीएल के निदेशक डॉ. एसडी पांडेय ने बताया कि बाग का फल खत्म होने के बाद किसानों को सबसे पहले पेड़ की कटाई-छंटाई, पत्तों और छिलकों के निस्तारण के बारे में बताया जाएगा। इसके बाद बागों की जोताई, सिंचाई व उचित खाद के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी। नए किसानों को बाग लगाने की जानकारी दी जाएगी।

कई राज्यों से पौधों की डिमांड 

इस बार भी अन्य प्रदेशों में लीची के पौधे भेजे जाएंगे। अभी उत्तर प्रदेश के मेरठ से छह हजार, नगालैंड व मिजोरम सें तीन-तीन हजार व पश्चिम बंगाल से 600 पौधे की मांग आई है। अगस्त तक पौधे भेज दिए जाएंगे। पिछले लॉकडाउन में करीब 10 हजार पौधे सहारनपुर, देवबंद, मुरादाबाद व बरेली भेजे गए थे।

मांग से उत्साहित हैं किसान 

बिहार लीची उत्पादक संघ के अध्यक्ष बच्चा प्रसाद सिंह ने बताया कि पिछले साल 70 से 80 टन लीची का उत्पादन हुआ था। करीब 200 करोड़ की कमाई हुई थी। इस बार लगभग 50 टन उत्पादन हुआ है, लेकिन बाजार भाव अच्छा है। अब तक 300 करोड़ तक के कारोबार का अनुमान है।  

Edited By: Ajit Kumar