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सीएम नीतीश को अब पता चलेगा आटा-दाल का भाव...मेन फ्रंट बनाने की कवायद के बीच आई भाजपा की प्रतिक्रिया

Nitish Kumar vs BJP सीएम नीतीश कुमार अपने दिल्ली प्रवास से बिहार वापस आ गए हैं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने मेन फ्रंट बनाने की कवायद शुरू की। अब बिहार में इसको लेकर राजनीति शुरू हो गई है। खासकर विपक्षी भाजपा हमलावर है।

By Ajit KumarEdited By: Published: Fri, 09 Sep 2022 10:09 AM (IST)Updated: Fri, 09 Sep 2022 10:09 AM (IST)
सीएम नीतीश कुमार गैर भाजपाई दलों को एक साथ लाने की कवायद कर रहे हैं। फाइल फोटो

मुजफ्फरपुर, [अमरेंद्र तिवारी]। लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha elections 2024) तथा बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar assembly elections 2025) अभी बहुत दूर है। बावजूद बिहार (Bihar Politics) में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। पहले एनडीए (NDA) की जगह महागठबंधन (Grand Alliance) की सरकार बनी। तेलंगाना (Telangana) के सीएम के चंद्रशेखर राव (KCR) सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) से मिलने पटना (Patna) पहुंचे और बाद में बिहार के सीएम नीतीश कुमार दिल्ली गए और वहां उन्होंने गैर भाजपाई दल के नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद अब मेन फ्रंट (Main Front) बनाने की बात शुरू हो गई है। नीतीश कुमार अपनी दिल्ली यात्रा समाप्त कर वापस बिहार आ गए हैं, लेकिन बिहार में अब राजनीति तेज हो गई है। खासकर विपक्षी बीजेपी (BJP) और अधिक हमलावर हो गई है। बिहार भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और मुजफ्फरपुर से सांसद अजय निषाद (Ajay Nishad) ने इसे तीर्थयात्रा करार देते हुए कहा है कि अब सीएम को राजनीति के आटा-दाल का सही भाव पता चलेगा।  

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कभी अपने दम पर कुछ नहीं किया

मीडिया से बात करते हुए अजय निषाद ने कहा कि नीतीश कुमार दलों की एकता और गठबंधन की बात ही कर सकते हैं। अकेले दम पर तो कभी कुछ किया ही नहीं और न कभी कर पाएंगे। केवल पीएम बनने का सपना पाल लेने से कुछ नहीं होता है। इसके लिए जो विजन चाहिए, वह उनके पास नहीं है। जब मुकाबला पीएम नरेंद्र मोदी से हाे तो उनके सामने तो कुछ भी नहीं है। केवल कुछ नेताओं से मुलाकात कर लेने और मेन फ्रंट की बात कर लेने भर से कुछ नहीं होने वाला है। इसके लिए जनसमर्थन चाहिए और यह फिलहाल भाजपा के पास है।

पूरे देश में पहचान कायम करना नामुमकिन

मुजफ्फरपुर सांसद ने कहा कि नीतीश कुमार को अभी देश का रकबा व चौहद्​दी समझना होगा। यहां की विविधता से परिचित होना होगा। पूरे देश में पहचान बना लेना मुश्किल काम है। जब सामने में नरेंद्र मोदी हों तो नामुमकिन है। नीतीश कुमार ने बिहार में ऐसा कुछ भी नहीं किया है जिसको एक माडल के रूप में वे बिहार के बाहर पेश कर पाएंगे। गुजरात वाली बात नहीं है। जो भी योजनाएं इन्होंने शुरू कीं, वे लोगों की परेशानी का ही कारण बनीं। शराबबंदी ने तो पूरा बेड़ा की गर्क कर रखा है। इसलिए सपना देखें, उसमें किसी को परेशानी नहीं है, लेकिन यह पूरा होने वाला नहीं है।  


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