मुजफ्फरपुर की सुरभि बिना कोचिंग लिए क्रैक कीं BPSC, सीमित संसाधनों से लड़कर बनीं DSP
BPSC Success Story: मुजफ्फरपुर की सुरभि कुमारी ने बिना किसी कोचिंग के बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर डीएसपी का ...और पढ़ें

प्राइवेट टीचर की बेटी सुरभि कुमारी। (AI Generated Image)
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। BPSC Success Without Coaching: हौसले बुलंद हों और इरादे फौलादी हों तो संसाधनों की कोई भी कमी कभी सफलता के आड़े नहीं आती। इसे एक बार फिर सच कर दिखाया है मुजफ्फरपुर के चंदवारा निवासी एक प्राइवेट टीचर की बेटी सुरभि कुमारी ने।
इस साल बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में सुरभि ने शानदार सफलता हासिल करते हुए सीधे डीएसपी (DSP) के पद पर अपना चयन सुनिश्चित किया है। उनकी इस कामयाबी ने पूरे इलाके का मान बढ़ा दिया है।
सीमित संसाधनों के बावजूद नहीं मानी हार
सुरभि के पिता संजय कुमार एक प्राइवेट टीचर हैं, जबकि उनकी माता किरण देवी गृहणी हैं। आर्थिक रूप से बेहद सीमित संसाधनों के बावजूद सुरभि ने कभी भी परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके और न ही हार मानी। वह शुरू से ही पढ़ाई में काफी अव्वल रहीं।

उन्होंने सीबीएसई (CBSE) दिल्ली बोर्ड से मैट्रिक की परीक्षा में 95 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। इसके बाद उन्होंने बीआरए बिहार विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की, जिसमें उन्हें 65 प्रतिशत अंक मिले।
तीसरे प्रयास में मिली पहली बड़ी सफलता
सुरभि ने अपनी संघर्ष यात्रा साझा करते हुए बताया कि यह उनका बीपीएससी का तीसरा प्रयास था। इससे पहले के दो प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
इस बार उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया और पहली बार एक साथ पीटी, मेंस और इंटरव्यू की बाधाओं को पार करते हुए सीधे डीएसपी पद पर बाजी मार ली।
सबसे बड़ी और खास बात यह है कि सुरभि ने यह ऐतिहासिक सफलता बिना किसी बड़े और महंगे कोचिंग संस्थान की मदद के हासिल की है।
उन्होंने कहा, "मैंने अपना पीसीएस बिना किसी नामी इंस्टीट्यूट की सहायता के सेल्फ स्टडी के बल पर क्लियर किया है। मुझे अपनी मेहनत और भगवान पर पूरा भरोसा था।"
परिवार का मिला अटूट समर्थन
अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय सुरभि अपने माता-पिता और पूरे परिवार को देती हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने उनके इस सफर में हर कदम पर उनका साथ दिया।
एक प्राइवेट टीचर होने के नाते उनके पिता हमेशा से पढ़ाई के महत्व को गहराई से समझते रहे और बेटी को लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे।
बेटियों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत
कम आय वाले एक साधारण परिवार से निकलकर, बिना किसी कोचिंग के, सिर्फ अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और आत्मविश्वास के दम पर वर्दी हासिल करना हर किसी के बस की बात नहीं होती।
सुरभि की यह प्रेरणादायक कहानी साबित करती है कि अगर इरादे पक्के हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है। फिलहाल वह प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं और जल्द ही उनकी आधिकारिक पोस्टिंग होगी।
अब बदल रही समाज की सोच
एसकेएमसीएच की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमृता प्रितम ने कहा कि आज बेटियां किसी की मोहताज नहीं रहीं। वे अपनी प्रतिभा के बल पर मनचाहा मुकाम हासिल कर रही हैं और परिवार का नाम रोशन कर रही हैं।
चिकित्सक डॉ. शालिनी ने कहा कि अब माता-पिता को बेटी के जन्म पर चिंता नहीं, बल्कि गर्व होता है। वे बेटियों को घर की चारदीवारी में कैद करने के बजाय बेटों की तरह आगे बढ़ने में हरसंभव मदद कर रहे हैं।
वहीं, डॉ. प्रीति सिंह ने कहा कि खेल के मैदान से लेकर सीमा सुरक्षा, और डॉक्टर-इंजीनियर बनने तक, हर क्षेत्र में बेटियां बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं, जिससे समाज की पुरानी सोच में सकारात्मक बदलाव आया है।
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