मुजफ्फरपुर गैस पाइपलाइन ब्लास्ट पर बड़ा खुलासा, नहीं थी ऑटोमैटिक वाल्व बंद होने की व्यवस्था
Muzaffarpur Gas Pipeline Blast: मुजफ्फरपुर गैस पाइपलाइन ब्लास्ट मामले में खुलासा हुआ है कि पीएनजी पाइपलाइन में गैस रिसाव होने पर आपूर्ति स्वतः बंद होने की कोई व्यवस्था नहीं है।

गैस रिसाव की सूचना मिलने के बाद तकनीकी टीम को मौके पर जाकर मैन्युअल रूप से वाल्व बंद करना पड़ता है!
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। IOCL Automatic Shutdown System: गोबरसही-डुमरी रोड में हुए गैस पाइपलाइन ब्लास्ट मामले में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है।
पीएनजी (PNG) गैस की हाई-प्रेशर पाइपलाइन में गैस लीक होने पर आपूर्ति स्वतः (ऑटोमैटिक) बंद होने की कोई व्यवस्था ही नहीं है।
स्थिति यह है कि गैस रिसाव की सूचना मिलने के बाद तकनीकी टीम को मौके पर जाकर मैन्युअल रूप से वाल्व बंद करना पड़ता है, तभी जाकर पाइपलाइन से गैस की आपूर्ति रुक पाती है।
शहर के कई घनी आबादी वाले इलाकों से, विशेषकर गोबरसही और बैरिया की तरफ से ऐसी हाई-प्रेशर गैस पाइपलाइनें गुजरती हैं।
नियमों की अनदेखी और लापरवाही
प्रावधान के अनुसार, किसी भी विभाग या एजेंसी द्वारा पाइपलाइन वाले क्षेत्र में खोदाई कराने से पहले संबंधित विभाग और ठेकेदार को इंडियन ऑयल (IOCL) को सूचित करना और अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
इसके बावजूद गोबरसही में सोमवार की सुबह ठेकेदार द्वारा कथित तौर पर बिना किसी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए मनमाने तरीके से खोदाई शुरू कर दी गई। इसी दौरान गैस पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और भीषण हादसा हो गया।
आज पटना से पहुंचेगी टीम
इस दर्दनाक हादसे के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर भी जांच तेज कर दी गई है। मंगलवार को पथ निर्माण विभाग (RCD) की एक विशेष टीम पटना से मुजफ्फरपुर जांच के लिए पहुंचेगी।
अधीक्षण अभियंता ई. अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि यह उच्चस्तरीय जांच की जाएगी कि आखिर लापरवाही किस स्तर पर और किसकी ओर से हुई है। इस दौरान मुख्य अभियंता के भी आने की संभावना है, जो मौके का मुआयना करेंगे।
ऑटोमैटिक सिस्टम न होने पर सवाल
अधीक्षण अभियंता ने बताया कि निर्माण कार्य तय प्रोटोकॉल के तहत चल रहा था और आईओसीएल को इसकी पूर्व सूचना दी गई थी।
उन्होंने आईओसीएल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई अन्य बड़े शहरों में गैस रिसाव होते ही ऑटोमैटिक कनेक्शन बंद होने की तकनीक होती है, लेकिन यहां आईओसीएल द्वारा ऐसा कोई सिस्टम नहीं लगाया गया है।
यदि ऑटोमैटिक सिस्टम होता या समय पर उनकी टीम पहुंचकर वाल्व बंद कर देती, तो शायद यह बड़ा हादसा टल जाता।
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