मुजफ्फरपुर के किसानों की बदलेगी खेती, रसायन छोड़ प्राकृतिक तरीके से बढ़ाएंगे कमाई
मुजफ्फरपुर में कृषि विभाग ने किसानों की आय बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा ...और पढ़ें
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इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
कृषि विभाग मुजफ्फरपुर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देगा।
चार प्रखंडों में 200 हेक्टेयर पर क्लस्टर बनेंगे, 500 किसान जुड़ेंगे।
लागत घटेगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और रसायन मुक्त अनाज मिलेगा।
अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर बढ़ते खर्च से परेशान किसानों के लिए राहत की खबर है। अब खेती की लागत घटाने के साथ मिट्टी की सेहत सुधारने पर भी जोर दिया जाएगा।
मुजफ्फरपुर में कृषि विभाग ने प्राकृतिक खेती को खेत-खेत तक पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है। जिले के चार प्रखंडों में 200 हेक्टेयर जमीन पर प्राकृतिक खेती के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इसमें 500 किसानों को जोड़ा जाएगा।
जिले में प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने के लिए कृषि विभाग ने अभियान शुरू किया है। इसके तहत सरैया, कटरा, कांटी और मुशहरी प्रखंड में चार क्लस्टर बनाए जाएंगे। प्रत्येक क्लस्टर में 50 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कराई जाएगी। इस तरह कुल 200 हेक्टेयर क्षेत्र को इसके दायरे में लाया जाएगा।
हर क्लस्टर में 125 किसानों की भागीदारी
योजना के तहत प्रत्येक क्लस्टर में 125 किसानों को जोड़ा जाएगा। इस तरह चारों क्लस्टर में कुल 500 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ेंगे। चयनित किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक और इसके फायदे बताए जा रहे हैं। किसानों को रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशी की मिलेगी सुविधा
किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जाएगी। योजना के तहत जैविक उर्वरक और प्राकृतिक कीटनाशी उपलब्ध कराने के लिए केंद्र खोले जाएंगे। इससे किसानों को खेती के लिए जरूरी सामग्री स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगी।
घटेगी लागत, बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने की तकनीक बताई जाएगी। उन्हें बीज और तकनीकी सहायता भी दी जाएगी। कृषि विभाग का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार के साथ खेती की लागत में भी कमी आएगी।
कृषि सखियों को भी दिया जाएगा प्रशिक्षण
कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी सहायक निदेशक मिट्टी जांच प्रयोगशाला दीपक कुमार बनाए गए हैं। उनकी निगरानी में क्लस्टर आधारित प्राकृतिक खेती का संचालन होगा। जिला कृषि पदाधिकारी भारत भूषण ने बताया कि चयनित किसानों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस कार्य में कृषि सखियों की भी मदद ली जाएगी। उन्हें भी प्राकृतिक खेती से जुड़ी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
रसायनमुक्त अनाज उपलब्ध कराने पर जोर
जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी। इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को रसायनमुक्त अनाज उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम आगे बढ़ेगा।
