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मुजफ्फरपुर में किसानों को डीएपी देने में मनमानी पड़ी भारी, कृषि विभाग ने खाद एजेंसी का लाइसेंस किया रद

Published: Wed, 07 Oct 2026 02:14 PM (IST)

कृषि विभाग ने मुजफ्फरपुर की थोक उर्वरक प्रतिष्ठान मेसर्स अशोक टायर एजेंसी का लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई ...और पढ़ें

इसमें किसान की प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें किसान की प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. अशोक टायर एजेंसी का उर्वरक लाइसेंस तत्काल रद किया गया।

  2. डीएपी की कालाबाजारी और अधिक कीमत वसूलने का आरोप।

  3. कृषि विभाग ने थोक विक्रेता पर सख्त कार्रवाई की।

अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। डीएपी उर्वरक की कालाबाजारी और खुदरा विक्रेता से निर्धारित दर से अधिक राशि लेने के आरोप में कृषि विभाग ने सिकंदरपुर चौक स्थित थोक उर्वरक प्रतिष्ठान मेसर्स अशोक टायर एजेंसी पर कार्रवाई की है।

किसी भी प्रकार के उर्वरक की आपूर्ति नहीं करने का निर्देश

जिला कृषि पदाधिकारी ने प्रतिष्ठान का उर्वरक निबंधन लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद कर दिया है। साथ ही सभी उर्वरक निर्माता कंपनियों को एजेंसी को किसी भी प्रकार के उर्वरक की आपूर्ति नहीं करने का निर्देश दिया गया है।

यह कार्रवाई कुढ़नी के खुदरा उर्वरक विक्रेता मेसर्स श्री ट्रेडर्स के प्रोपराइटर की शिकायत के बाद की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अशोक टायर एजेंसी ने दो लाख रुपये लेने के बाद उन्हें मात्र 100 बोरी डीएपी उपलब्ध कराई।

इस हिसाब से प्रति बोरी दो हजार रुपये की राशि ली गई, जो निर्धारित दर से अधिक बताई गई। मामला सामने आने के बाद कृषि विभाग ने थोक विक्रेता से स्पष्टीकरण मांगा।

वैध कागजात या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका

स्पष्टीकरण में एजेंसी की ओर से दो लाख रुपये लेने की बात स्वीकार की गई, लेकिन इसके समर्थन में वैध कागजात या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। एजेंसी की ओर से राशि अमोनिया सल्फेट के लिए लिए जाने का दावा किया गया।

जिला कृषि पदाधिकारी भारत भूषण ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला उर्वरक नियंत्रण आदेश और आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़ा है।

मामले में पहले लाइसेंस निलंबित करते हुए अंतिम स्पष्टीकरण मांगा गया था। जवाब मिलने के बाद अब लाइसेंस रद कर दिया गया है। इसकी जानकारी विभाग के वरीय अधिकारियों को भी दी गई है।

पहले भी अशोक टायर की एजेंसी रद की गई थी। इस एजेंसी की लगतार शिकायत के बाद लाइसेंस बहाल किए जाने पर भी सवाल उठता रहा है।

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