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    Bihar news: लोकनायक का मुजफ्फरपुर में मुशहरी माडल अब भी सबकी जुबान पर

    By Amrendra TiwariEdited By: Dharmendra Kumar Singh
    Updated: Tue, 11 Oct 2022 10:51 AM (IST)

    Bihar news दस माह तक मुशहरी के गांवों में घूमे और 117 ग्राम सभा का गठन कराया। जेपी की पहल पर सोमनाही गांव में डकैती से जुड़े 112 लोगों ने किया था आत्मसमर्पण। गरीबों के बीच जमीन का वितरण शुरू हुआ रोजगार के साधन मुहैया कराए गए।

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    लोकनायक जयप्रकाश नारायण दूरी को पाटने के लिए आए थे मुजफ्फरपुर।

    मुजफ्फरपुर, जासं। लोकनायक जयप्रकाश नारायण का मुशहरी माडल अब भी सबकी जुबान पर है। सर्वोदयी को नक्सली अपना दुश्मन मानते थे। इस दूरी को पाटने के लिए जेपी मुशहरी आए थे। उनकी जयंती पर सर्वोदयी नेताओं ने पुरानी यादों को ताजा किया। जेपी के शिविर के प्रभारी रहे सर्वोदयी जगन्नाथ पांडेय कहते हैं कि उनकी पहल पर गरीबों के बीच जमीन का वितरण शुरू हुआ, रोजगार के साधन मुहैया कराए गए। इस तरह का वतावरण बनाकर बंदरा के सोमनाही गांव में डकैती गिरोह से जुड़े 112 लोगों का आत्मसमर्पण कराया गया।

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    जगन्नाथ पांडेय बताते हैं कि जेपी उनके गांव मैदापुर में ठहरे थे। उनकी अगुवाई में मादापुर चौबे गांव स्थित स्कूल परिसर में शिक्षा में सुधार पर मंथन हुआ। पांच स्कूलों को माडल के रूप में चिह्नित किया गया। इनमें मादापुर, सलहा, नरौली व झपहां शामिल थे। इसी तरह सात पंचायतों मादापुर चौबे, माधोपुर, डूमरी, शेरपुर, सुस्ता, मिठनपुरा व बुधनगरा राधे में विकास का काम ग्रामसभा के जरिए कराने की शुरुआत हुई। अफसोसजनक पहलु यह रहा कि जेपी के जाने के बाद सरकार व प्रशासन का इस ओर ध्यान नहीं रहा। उस अधिकार को सरकार के स्तर से वापस ले लिया गया।

    सर्वोदय आंदोलन को बल देने पहुंचे थे जेपी 

    यहां सर्वोदय आंदोलन परवान चढ़ रहा था। नक्सलियों को यह नागवार गुजरा। उन्होंने सर्वोदय कार्यकर्ता कोरलहिया निवासी बद्रीनारायण सिंह व तेपरी के गोपालजी मिश्र को जान से मारने की धमकी दे डाली। लोकनायक जयप्रकाश उस वक्त उत्तर प्रदेश (वर्तमान का उत्तराखंड) प्रवास पर थे। जानकारी हुई तो पांच जून 1970 को मुजफ्फरपुर पहुंचे। नरसिंहपुर खादी आश्रम से स्वतंत्रता सेनानी गांधीवादी गोपालजी मिश्र अपने गांव तेपरी जा रहे थे। नक्सलियों ने उनको गोली मार दी। उन्हें सदर अस्पताल लाया गया। जेपी को इसकी सूचना मिली। उनकी पहल पर पटना से वरीय चिकित्सक डा.बी. मुखोपाध्याय को बुलाया गया। गोपालजी मिश्र का इलाज हुआ और उनकी जान बची। इतना ही नहीं, ऐसी घटना दोबारा नहीं हो जेपी इसके लिए भी तत्पर हुए। यहां सर्वोदय कार्यकर्ताओं, प्रशासन के अधिकारियों, विभिन्न राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों के साथ विचार विमर्श किया।

    कई नक्सली समाज की मुख्यधारा में लौटे 

    मन में यह बात घूम रही थी कि सर्वोदय वाले और नक्सली जब दोनों चाहते हैं कि समाज का विकास हो, गरीब-अमीर की खाई पाटी जाए तो फिर यह आपसी वैर क्यों है? इधर, जेपी को जान मारने की धमकी वाला पर्चा वितरित होने लगा। जेपी को जानकारी हुई तो उन्होंने एलान किया कि या तो मेरा काम पूरा होगा या फिर मेरी हड्डी गिरेगी। उसके बाद वे लगातार करीब 10 माह तक मुशहरी इलाके के विभिन्न गांवों में घूमे। लोगों को प्रेरित कर 117 ग्राम सभा का गठन कराया। रोजगार के अवसर, सबको काम, सबको स्वास्थ्य तथा सबको पढ़ाई के इंतजाम का अभियान चलाया। उसके सुखद परिणाम सामने आए तथा कई युवा नक्सली सर्वोदय आंदोलन के साथ हो लिए। उस समय के नक्सली नेता राजकिशोर व मो. तस्लीम से बातचीत कर सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की। इससे कई नक्सली समाज की मुख्यधारा में लौटे। जेपी आंदोलन में सहयोगी रहे रमेश पंकज बताते हैं कि गांधी के बाद जेपी की मुजफ्फरपुर यात्रा से यहां सर्वोदय आंदोलन को बल मिला तथा सामाजिक समरसता मजबूत हुई। जेपी के सिपाही रहे परमहंस कहते हैं कि एक साथ नक्सली आंदोलन से जुड़े लोग व सर्वोदय कार्यकर्ता बैठने लगे तो दूरी खत्म हुई।