बिहार में इस जगह महर्षि वाल्मीकि ने माता सीता को वन देवी के रूप में दी थी शरण, पर्यटन से इसे जोड़ने की है जरूरत
पूर्वी चंपारण के अरेराज अनुमंडल क्षेत्र स्थित वाल्मीकि आश्रम का रामायण काल से जुड़ाव है। महर्षि वाल्मीकि ने गंडक के तट पर अवस्थित इसी आश्रम में माता सीता को शरण दी थी।
पूर्वी चंपारण, [विजयेन्द्र कुमार मिश्र]। अरेराज अनुमंडल क्षेत्र की मुडा पंचायत अंतर्गत स्थित वाल्मीकि आश्रम का जुड़ाव रामायण काल से बताया जाता है। स्थानीय लोगों की इस स्थल के प्रति गहरी आस्था है। इस स्थल को धार्मिक पर्यटन से जोड़कर विकसित करने की आवश्यकता है।
वाल्मीकि ने यहीं माता सीता को दी थी शरण
अरेराज अनुमंडल मुख्यालय से लगभग पांच किलोमीटर दूर विशाल तालाब के किनारे बाल्मीकि आश्रम है। जनश्रुति है कि माता सीता ने यहां प्रवास किया था। महॢष वाल्मीकि ने गंडक के तट पर अवस्थित इसी आश्रम में उन्हेंं वन देवी के रूप में शरण दी थी। ऐसा माना जाता है कि लव व कुश का उपनयन संस्कार मुडा गांव मेंं ही हुआ था और संग्रामपुर के मैदान में राम की चतुरंगी सेना के साथ लव-कुश का युद्ध हुआ था। यहां स्थित चंडी माता स्थान को भी जनश्रुतियों में उस काल से जोड़ा जाता है। उस गौराव गाथा का साक्षी है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन को आते हैं।
रामनवमी के अवसर पर लगता है मेला
आम, पीपल, बेल, महोगनी, केवड़ा, व मवलेश्वरी आदी के सघन वृक्षों से यह भू-भाग आच्छादित है। राम- सीता से जुड़ा स्थान होने के कारण प्रत्येक वर्ष यहां रामनवमी के मौके पर भव्य मेले का आयोजन होता आ रहा है। जिस सरोवर में माता सीता स्नान करतीं थीं उसमें श्रद्धालु डुबकी लगाकर पुण्य के भागी बनते हैं।
स्थल के विकास के लिए भेजा गया है प्रस्ताव
गांव के सेवानिवृत्त शिक्षक मदन मोहन नाथ तिवारी ने बताया कि इस स्थान के विकास के लिए बिहार सरकार के तत्कालीन पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार ने तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी धीरेन्द्र कुमार मिश्र से प्रस्ताव की मांग की थी, जिसको जिला पदाधिकारी को भेजा जा चुका है। इधर मनरेगा द्वारा बल्मीकि स्थान के सौन्दर्यीकरण के लिए कार्य कराया जा रहा है। साथ ही गांव के लोगों द्वारा चंदा एकत्रित कर आश्रम के जर्जर हो चुके भवन का नए सिरे से निर्माण कराया जा रहा है।
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