लीची के किसान स्क्वैश और रसगुल्ला बनाकर बढ़ा सकते आमदनी, विशेषज्ञों ने बताए उद्यमिता विकास के गुर
उद्यमिता विकास के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार झारखंड और यूपी के 26 उद्यमियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान लीची स्क्वैश लीची आरटीएस (रेडी टू सर्व) और लीची रसगुल्ला बनाने की तकनीकी जानकारी उनलोगों को दी गई। इस दौरान केंद्र के निदेशक ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से प्रतिभागी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं और अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

संवाद सहयोगी, मुशहरी(मुजफ्फरपुर)। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में लीची पेय पदार्थों के सूक्ष्म प्रसंस्करण पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को हो गया। उद्यमिता विकास के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 26 उद्यमियों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण में लीची स्क्वैश, लीची आरटीएस (रेडी टू सर्व) और लीची रसगुल्ला बनाने की तकनीकी जानकारी दी गई। कार्यक्रम का समन्वयन इंजीनियर अंकित कुमार ने किया। केंद्र के निदेशक डा. बिकाश दास ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से प्रतिभागी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं और अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इससे उन्हें आजीविका का साधन मिलेगा और वे दूसरों को भी रोजगार दे सकेंगे।
प्रशिक्षण में भाग लेने वाले उद्यमियों शैलेंद्र कुमार, सदातपुर, रणधीर कुमार गुप्ता, प्रह्लादपुर, शारदानंद झा, मुरौल, अभिषेक, मोतिहारी, अनुष्का राज, समस्तीपुर, संजय कुमार, भागलपुर, इशिका, खुटाहां, खुशी, गोपालगंज, राजा शर्मा, बालूघाट, प्रेरणा प्रिया, प्रजापति नगर अतरदह, आदित्य आनंद, नामकुम, रांची, सत्यनारायण सहनी, प्रेम कुमार, सीतामढ़ी, सार्थक कश्यप, मझौलिया, हर्षित पांडेय, बांदा, उत्तर प्रदेश, विक्की कुमार साह, सीतामढ़ी, अदिति तिवारी, अंकित तिवारी, भगवानपुर, अमन राज, कांटी, हितेश कुमार, चंदनपट्टी, अरुण कुमार गायघाट, आयुष राज, वैशाली आदि शामिल रहे। मौके पर केंद्र के वरिष्ठ विज्ञानी डा. अभय कुमार, डा. सुनील कुमार, डा. भाग्या विजयन, तकनीकी अधिकारी उपज्ञा साह, यंग प्रोफेशनल चमन कुमार, परियोजना सहायक श्याम पंडित आदि थे।
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