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    दरभंगा निवासी आइपीएस अरुण कुमार बने यूआइसी के वाइस चेयरमैन, 1985 बैच के हैं आइपीएस

    By Dharmendra Kumar SinghEdited By:
    Updated: Thu, 01 Jul 2021 05:01 PM (IST)

    दरभंगा जिले के भुसकौल गांव के निवासी अरूण ने विभिन्न पदों पर रहते हुए किए ऐतिहासिक कार्य सेवानिवृत्ति के बाद आइपीएस अरुण कुमार को यूआइसी (यूनियन इंटरनेशनेल डेस केमिंस इंटरनेशनल यूनियन ऑफ रेलवे) सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म के वाइस चेयरमैन बनाया गया है।

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    दरभंगा न‍िवासी आरपीएफ के डीजे अरुण कुमार अब सेवानिवृत हो गए।

    दरभंगा, जासं। आरपीएफ के डीजे अरुण कुमार अब सेवानिवृत हो गए। उत्तर प्रदेश कैडर के 1985 बैच के आइपीएस अरुण कुमार दरभंगा जिले के सदर प्रखंड क्षेत्र के भुसकौल गांव के निवासी हैं। दरभंगा शहर के शाहगंज में भी उनका आवास है। जहां उनके पिता कृष्ण कुमार ठाकुर और माता सुशीला ठाकुर रहते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद आइपीएस अरुण कुमार को यूआइसी (यूनियन इंटरनेशनेल डेस केमिंस, इंटरनेशनल यूनियन ऑफ रेलवे) सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म के वाइस चेयरमैन बनाया गया है। वे एक जुलाई को इस पद पर अपना योगदान देंगे। इस सूचना से मिथिला क्षेत्र में खुशी की लहर है। उनके चचेरे भाई अनिल ठाकुर, नवीन ठाकुर आदि सहित मोहल्ले के लोगों ने खुशी जाहिर की है। कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर चयन मिथिला के लिए गर्व की बात है। बता दें कि इस पद पर वे जुलाई 2022 तक बने रहेंगे। बता दें कि यह रेलवे का अंतरराष्ट्रीय संघ है। जिसका मुख्यालय पेरिस है। यूआइसी सुरक्षा मंच को व्यक्तियों, संपत्तियों और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा से संबंधित मामलों में रेल क्षेत्र की ओर से विश्लेषण, नीति स्थित विकसित करने और तैयार करने का अधिकार है। सुरक्षा मंच यूआईसी सदस्यों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचना और अनुभव का आदान-प्रदान कर बढ़ावा देने के साथ सदस्यों या बाहरी घटनाओं की आवश्यकता के अनुसार रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में सामान्य हित परियोजनाओं और गतिविधियों का प्रस्ताव करता है।

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    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली कामयाबी, बनी पहचान 

    आइपीएस अरुण कुमार की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई गांव से हुई। गांव से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दरभंगा के शहर के एमएल एकेडमी हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने दरभंगा साइंस कॉलेज में दाखिला लिया। यहां के बाद उन्होंने रुड़की यूनिवर्सिटी में नामांकन लिया, जहां से हुए गोल्ड मेडलिस्ट बने। इंजीनियर बनने के बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में सफलता पाई। उत्तर प्रदेश कैडर के 1985 बैच के आइपीएस बने । अपने नौकरी के कैरियर में उन्होंने यूपी पुलिस के बाद सीबीआई, सीआरपीएफ और बीएसएफ में भी योगदान दिया। 2001 में डीआइजी, 2006 में आइजी, 2012 में यूपी में एडीजी के साथ 2016 में वो यूपी के डीजीपी बने। सीबीआई में डीआइजी रहने दौरान उन्होंने 2004 में 32 करोड़ का तेलगी फेक स्टांप स्केम केस को देखा था।

    2006 में नेठारी हत्या और 2008 में आरुषि तलवार मर्डर केस को भी उन्होंने देखा था। उनकी सफलता पर 2005 में फिल्म निर्देशक कबीर कौशिक ने एक ट्रेलर मूवी बनाई थी। बॉलीवुड अभिनेता अरशद वारसी ने फिल्म में आइपीएस अरुण कुमार की मुख्य भूमिका निभाई थी। उन पर 2008 में एक और बॉलीवुड फिल्म तलवार बनी। नोडिया डबल मर्डर केस पर बनी इस फिल्म इसमें इरफान खान सीबीआई के संयुक्त निदेशक अरुण कुमार की भूमिका निभाई थी।

    अमानक पानी की बिक्री पर लगाई रोक :

    अरुण कुमार ने आरपीएफ का डीजी बनने दौरान उन्होंने कई बेहतर काम किए जिसके लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे। स्टेशन पर बिना मानक की पानी की बिक्री की शिकायत को उन्होंने गंभीरता से लिया था। इसके बाद स्टेशनों पर बिना मानक की पानी बेचने वाले पर सख्ती से कार्रवाई की गई। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने कई एप लांच किया।