मुजफ्फरपुर, जेएनएन। उत्तर पूर्व के नागालैंड, जम्मू-कश्मीर समेत अन्य प्रदेशों से अवैध ढंग से आर्म्स लाइसेंस लेने वालों पर शिकंजा कसने को लेकर रणनीति तैयार की गई है। इसके लिए मुख्यालय की ओर से प्रदेश के सभी डीएम, एसएसपी व एसपी को निर्देश जारी किया गया है। आदेश दिया गया है कि हर हाल में तीन महीने के अंदर अवैध ढंग से आर्म्स लेने वालों की पहचान कर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करानी है।

        पत्र में कहा गया है कि हथियार तस्करों के राष्ट्र व्यापी गिरोह के माध्यम से आर्म्स लाइसेंस प्राप्त किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल संगठित अपराध करने वाले एवं आपराधिक वर्चस्व स्थापित करने के लिए किया जा रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए पुलिस मुख्यालय की ओर से इन राज्यों से जारी शस्त्र लाइसेंस के सत्यापन के लिए मानक परिचालन प्रक्रिया निर्धारित की जानी है। बिहार के नागरिकों द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में नागालैंड, जम्मू कश्मीर एवं अन्य राज्यों से अवैध रूप से शस्त्र लाइसेंस प्राप्त किया जा रहा है। इस पर शीघ्र ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

इस तरह से आर्म्स लेने वालों में त्रुटि -

- अस्थायी पता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त किया जाता है।

- लाइसेंसधारी के स्थायी पता का सत्यापन अथवा आपराधिक इतिहास के संबंध में स्थानीय थाना से सत्यापन नहीं कराया जाता है।

- सक्षम प्राधिकार के जाली हस्ताक्षर से लाइसेंस बनाने वाले नेटवर्क के जरिए लाइसेंस प्राप्त कर लिया जाता है।

- आर्म्स नियम 2016 में प्रावधानित यूआइएन नंबर भी लाइसेंस पर जाली अंकित किया जाता है।

- शस्त्र विक्रेता भी इस गठजोड़ में भागीदार होते हैं। वे जाली लाइसेंस पर अत्याधुनिक मुनाफा लेकर आधुनिक हथियारों की बिक्री करते हैं।

- एक ही लाइसेंस पर एक से अधिक शस्त्रों की बिक्री की जाती है। 

Posted By: Ajit Kumar

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