Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    बिहार मैट्रिक परीक्षा 1996 का थर्ड डिविजनर आज छत्तीसगढ़ का आइएएस, ये कर सकते हैं तो कोई भी कर सकता है

    By Ajit KumarEdited By:
    Updated: Sat, 09 Jul 2022 12:16 PM (IST)

    IAS Success Storyबिहार के समस्तीपुर निवासी अवनीश शरण छत्तीसगढ़ कैडर के आइएएस हैं। उन्होंने विगत छह जुलाई को अपना मैट्रिक का अंकपत्र ट्विट किया। उसके बाद यह पोस्ट वायरल हो गया। उस पोस्ट पर तरह-तरह की प्रतक्रियाएं आ रही हैं।

    Hero Image
    अवनीश शरण ने 1996 में मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। फोटो: ट्विटर

    मुजफ्फरपुर, आनलाइन डेस्क। बिहार बोर्ड से मैट्रिक की परीक्षा थर्ड डिविजन से पास करने वाले छात्र से आप क्या उम्मीद करते हैं? वह भविष्य में क्या बन सकता है? यदि मैं कहूं, आइएएस तो शायद आपको यकीन न हो। बिहार के समस्तीपुर जिला निवासी अवनीश शरण वर्तमान में छत्तीसगढ़ कैडर के 2009 बैच के आइएएस हैं। उन्होंने दलसिंहसराय के आरएचएस से वर्ष 1996 में मैट्रिक की परीक्षा दी थी। उस समय वे थर्ड डिविजन से पास हुए थे। कुल 700 अंक में से उन्हें केवल 314 अंक ही मिले थे। यानी 44.5 फीसद। विगत छह जुलाई को उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से 10वीं की मार्क्सशीट शेयर की। इसके बाद तो प्रतिक्रयाओं की बाढ़ ही आ गई। तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। कोई एक अंक के महत्व को समझा रहा तो कोई कह रहा, वे कर सकते हैं तो कोई भी कर सकता है। 

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    मैथ में 100 में से उन्हें केवल 31 अंक

    दरअसल छत्तीसगढ़ कैडर के 2009 बैच के आइएएस अवनीश शरण ट्विटर पर अच्छे खासे सक्रिय रहते हैं। वे तरह-तरह के पोस्ट डालते रहते हैं। इस बीच उन्होंने छह जुलाई को 10वीं की मार्क्सशीट कैप्शन के साथ एक तस्वीर शेयर की। यह तस्वीर उनकी 10वीं की मार्क्सशीट ही थी। उसके बाद उनका यह पोस्ट वायरल हो गया। हर प्लेटफार्म पर शेयर किया जाने लगा। लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ इसको शेयर करने के पीछे का उद्​देश्य जानना चाह रहे थे तो कुछ इससे प्रेरित भी नजर आए। खासकर मैथ में उनके प्रदर्शन को देखकर बहुत से विद्यार्थियों को हिम्मत मिली। क्योंकि वे गणित में केवल पास भर थे। 100 में से उन्हें केवल 31 अंक मिले। यानी केवल पास।

    बिहार में शिक्षक नहीं बन सकते

    अधिकांश यूजर इसे सकारात्मक भाव से ही ले रहे हैं। उनका मानना है कि मैट्रिक में इस स्तर का प्रदर्शन करने वाला स्टूडेंट यदि देश की सबसे कड़ी प्रतियोगिता में सफलता हासिल कर सकता है तो यह प्ररेणा देने वाली चीजें हैं। इंसान जहा से शुरू कर दे वहीं से नई जिंदगी शुरू हो जाती है। मणिशंकर नामक यूजर ने लिखा, आप औसत प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा हैं। एन कुमार मिश्रा नामक यूजर ने तंज करते हुए कहा कि इतना कम नंबर के साथ आप बिहार में शिक्षक नहीं बन सकते हैं। यहां आज भी नंबर दिखाओ, नौकरी पाओ है। सियाराम गुर्जर कहते हैं- नंबर और मार्क्सशीट कभी भविष्य तय नहीं करते हैं। अगर दिल में आग है तो कुछ भी कर सकते हैं।