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Diwali 2025 Date: 20 को ही मनाई जाएगी दीपावली, इस बार ग्रहों का अद्भुत संयोग

By GOPAL TIWARIEdited By: Ajit kumar
Published: Fri, 10 Oct 2025 06:30 PM (IST)Updated: Fri, 10 Oct 2025 06:37 PM (IST)

Deepavali 2025: वर्ष 2025 में दीपावली 20 नवंबर को मनाई जाएगी। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन ग्रहों का अद्भुत संयोग ...और पढ़ें

यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।

यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।

HighLights

  1. दीपावली 2025: 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

  2. शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी की पूजा करें।

  3. ग्रहों का अद्भुत संयोग बन रहा है।

गोपाल तिवारी, मुजफ्फरपुर। Diwali 2025: दीपावली की तिथि को लेकर किसी तरह के संशय में पड़ने की आवश्यकता नहीं है। ग्रहों के अद्भुत संयोग में कार्तिक अमावस्या यानी सोमवार 20 अक्टूबर 2025 को दीपावली मनाई जाएगी।

कोई संशय नहीं

पंडित प्रभात मिश्र ने बताया कि अमावस्या तिथि सोमवार को दोपहर बाद 2:32 मिनट से प्रारंभ होगी। यह 21 अक्टूबर मंगलवार को दिन में 4:26 मिनट तक रहेगी। इसलिए इस बार दीपावली का महापर्व 20 अक्टूबर 2025 यानी सोमवार को ही मनाया जाएगा।

pandit prabhat mishra jee

विधानपूर्वक पूजा करें

मां लक्ष्मी व गणेश की पूजा का मुहूर्त दोपहर बाद 2:39 बजे से लेकर रात्रि पर्यंत है। सभी राशि के जातक लोग अपनी ग्रहों की अनुकूलता और सुख समृद्धि के अनुसार विधानपूर्वक पूजा करें। विशेष लाभ मिलेगा।

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त

  • कुम्भ लग्न दिन में 2:09 से 03:40 तक
  • वृष लग्न शाम में 06:51 से 08:48 तक
  • सिंह लग्न मध्य रात्री 1:19 से 3:33 तक

ग्रहों का विशेष संयोग

दीपावली के दिन तीन ग्रहों का संयोग है। मंगल, सूर्य और बुध सभी आपस में मिलेंगे। इसका संयुक्त प्रभाव सभी राशि के लोगों के लिए शुभफल देने वाला माना जा रहा है। कार्तिक अमावस्या को दीपावली पूजन स्थिर लग्न में करने का विधान है। अधिकतर लोग स्थिर लग्न में ही महालक्ष्मी का पूजन करते हैं।

Deepawali 2025 date 2

अमावस्या की रात जो भी स्थिर लग्न में महालक्ष्मी की पूजा करते हैं उनके घर में मां लक्ष्मी की स्थिरता बनी रहती है। वैसे तो चार स्थिर लग्न हैं। पहला वृषभ, दूसरा सिंह, तीसरा वृश्चिक ओर चौथा कुम्भ।

सामान्यत तौर पर दीपावली की रात वृषभ लग्न होता है। जिसमें सभी महालक्ष्मी की पूजा करते हैं। सिंह लग्न मध्य रात्रि 1:19 से 3:33 बजे के बीच आता है। इस समय घनी रात्रि रहती है। अमावस्या और सिंह लग्न यानी सोने पर सुहागा। यह विशेष लाभदायक होता है।

श्रीयंत्र की स्थापना

श्रीयंत्र का केसरयुक्त गो दुग्ध से अभिषेक करते समय श्रीमन्त्र का जप करते रहें। श्रीयन्त्र दस महाविद्याओं में से एक मां त्रिपुरसुन्दरी का यन्त्र है। मां त्रिपुरसुन्दरी को ललिता देवी भी कहा जाता है। वह ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी हैं।

दीपावली के दिन स्फटिक या पारद श्रीयन्त्र की पूजा व स्थापना विशेष लाभकारी रहता है। जिस घर या प्रतिष्ठान में श्रीयन्त्र की स्थापना व नित्य पूजन होती है वहां कभी धन का अभाव नहीं रहता।

महालक्ष्मी पूजन का विधान

जो स्थिर लग्न में पूजन करना चाहते हैं वे सिंह, वृष, कुम्भ, लग्न में पूजन कर सकते हैं। इन सभी लग्नों में इंद्र, सरस्वती, कुबेर, लक्ष्मी, गणेश और मां काली की पूजा से सभी प्रकार के मांगलिक कार्य में सिद्धि प्राप्त होती है।

Deepawali 2025 date 1

दीपावली के दिन पूजा विधि

  • दीवाली के दिन मुख्य रूप से भ गणेश,लक्ष्मी इन्द्र, कुबेर, सरस्वती और मां काली की पूजा की जाती है। सबसे पहले दुकान या मकान में बन्धनबार लगाएं।
  • शाम को एक साफ चौकी बिछांए। इसके बाद इस पर गंगा जल से पवित्र करें।
  • गणेश और लक्ष्मी के साथ कुबेर और श्री यंत्र भी स्थापित करें।
  • पूजा स्थान पर जल भर के तांबे या मिट्टी का कलश रखें।
  • कलश पर रोली से स्वातिक बना लें और श्री लिखें।
  • इसके बाद मौली या एकरंगा कलश में बांध दें।
  • आम के पल्लव, एक सुपारी, सिक्का और सर्वऔषधि, पंचरत्न, सप्तमृतिका, डालने के बाद एक पूर्ण पात्र में नारियल डाल कर कलश के ऊपर रखें और पूजन आरम्भ करें। धान के लावा, मुरही, बतासा, मेवा मिष्ठान का भोग लगाएं।
  • मां लक्ष्मी को कमल का फूल प्रिय है इसलिए लोग कमल पुष्प के अभव में कमलगट्टा का प्रयोग करते हैं।
  • लक्ष्मी-गणेशजी की मूर्ति के आगे पांच घी या तेल के दीप जलाएं।
  • भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा के बाद कुबेर की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
  • तिजोरी,गल्ले और बहीखातों की भी पूजा करते हैं। जिससे संपन्नता मिले।

दीवाली के दिन शुभ योग

  • हंस महापुरुष योग: यह योग धन, सम्मान, ज्ञान और सफलता के लिए सबसे शुभ माना जाता है, जब बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में गोचर करते हैं।
  • शनि वक्री योग: यह योग कुछ राशियों के लिए धन लाभ और अप्रत्याशित सफलता के योग बनाता है, जब शनि देव वक्री चाल में मीन राशि में रहते हैं।
  • कलात्मक योग: कन्या राशि में शुक्र और चंद्र की युति से बनने वाला यह योग सुख-सुविधाएं, मानसिक शांति और रिश्तों में प्रेम प्रदान करता है।
  • बुधादित्य योग: तुला राशि में सूर्य और बुध की युति से बनने वाला यह योग बुद्धि, नेतृत्व क्षमता, और सफलता प्रदान करता है।

भगवान राम का अयोध्या वापसी पर स्वागत

दीवाली के बारे में यह भी कहा जाता है कि जब भगवान श्रीराम रावण का वध करके अयोध्या वापस लौटे तो उस समय भगवान राम का अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर स्वागत किया था। उस तिथि के बाद से प्रत्येक साल दीवाली मनाई जाने लगी। दिवाली को असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है। दीवाली के दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के साथ-साथ कुबेर,इन्द्र और मांकाली की भी पूजा की जाती है।