हायाघाट (दरभंगा), जासं। दरभंगा मेडिकल कालेज, अस्पताल से पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार की देर शाम दसवीं की छात्रा अर्चना कुमारी (14) का शव उसके घर हायाघाट थानाक्षेत्र के मोकरीडीह गांव पहुंचा परिजनों के चीत्कार से पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। मां वीता देवी, भाई दीपक कुमार, दिवाकर, बहन अंजली का रो-रोकर बुरा हाल था। इस बीच दादा गणेशी पासवान, महेशी पासवान सहित अन्य रिश्तेदारों ने बच्ची को अंतिम विदाई दी। छात्रा के भाई दीपक कुमार ने उसे मुखाग्नि दी।

बिना बताए घर से गई थी बाहर

मां वीता देवी अपनी बेटी के शव से लिपटकर रोते-रोते बेहोश हो रही थी। महिलाएं सांत्वना दे रही थी, लेकिन वह चुप होने का नाम नहीं ले रही थी। इधर, अर्चना की मां वीता देवी ने बताया कि अर्चना प्लस टू रानी चंद्रावती उच्च विद्यालय खरारी में दसवीं वर्ग की छात्रा थी। पिछले वर्ष किसी कारणवश उसका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया था। इस बार वह तैयारी कर रही थी। 20 सितंबर को समय करीब छह बजे शाम वह किसी को बताए घर से कहीं चली गई थी। 21 सितंबर को पति रामा पासवान ने उसे खोजबीन कर अपने घर लाए। बिना बताए वह बाहर गई थी, इसलिए पिता का गुस्सा परवान पर था। बच्ची को डराने के लिए पिता ने बांस के फट्टा से मारा-पीटा। कोई पिता अपनी बेटी को कैसे मार सकता है। जबकि परिवार के किसी सदस्य की उसे जान से मारने की नीयत नहीं थी। आज मेरी बेटी अर्चना इस दुनिया में नहीं है।

संयोग ही खराब था 

मौके पर पड़ोस के दो-तीन लोगों ने स्वीकार किया कि मृतका बच्ची दसवीं की परीक्षा को लेकर काफी उत्साहित थी,लेकिन पिता का गुस्सा उसे महंगा पड़ा,आज भी सभी लोग एक स्वर में कह रहे हैं कि संयोग ही बुरा था, जो थोड़ी सी पिटाई के बाद ही रामा की बच्ची की मौत हो गई। लोग तो यह भी कह रहे थे कि बाप भले ही हत्या के आरोप में जेल में बंद है,लेकिन उसे भी अथाह पश्चताप है। वहीं वादी व मृतका के दादा गणेशी पासवान ने भी स्पष्ट तौर पर कहा कि उनके मंझला बेटा रामा का अपनी पुत्री अर्चना को जान से मारने का इरादा नहीं था। मालूम हो कि पिता रामा पासवान मजदूरी कर अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण करता था। रामा के जेल जाने से घर पर दोहरी आफत आ पड़ी है। मृतका पांच भाई-बहनों में बड़ी थी। अब परिवार के समक्ष यक्ष प्रश्न लाकर खड़ा कर दिया है कि अब उसके परिवार का भरण-पोषण कौन करेगा।

Edited By: Dharmendra Kumar Singh