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    Seohar News: बेलवा में डैम निर्माण का काम पूरा नहीं, धीमी रफ्तार के साथ हो रहा निर्माण

    By Dharmendra Kumar SinghEdited By:
    Updated: Mon, 05 Apr 2021 05:25 PM (IST)

    किसानों की खेतों तक पानी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना की मंद रफ्तार से योजना पर ग्रहण लगता दिख रहा है। तत्कालीन डीएम की मानीटरिंग की वजह से बेलवाघाट डैम निर्माण कार्य में तेजी आई थी। वर्तमान डीएम ने भी युद्धस्तर पर निर्माण कार्य पूरा कराने का निर्देश दिया था।

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    तत्कालीन डीएम की मानीटरिंग की वजह से बेलवाघाट डैम निर्माण कार्य में तेजी आई थी।

    शिवहर, जासं। बागमती पुरानी धार की धाराओं में बदलाव कर डैम का निर्माण कर बाढ़ की तबाही का कारण बने पानी को अमृत बना किसानों की खेतों तक पानी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना की मंद रफ्तार से योजना पर ग्रहण लगता दिख रहा है। तत्कालीन डीएम की मानीटरिंग की वजह से बेलवाघाट डैम निर्माण कार्य में तेजी आई थी। वर्तमान डीएम ने सज्जन राजशेखर ने भी जनवरी में बेलवाघाट पहुंचकर  युद्धस्तर पर निर्माण कार्य पूरा कराने का निर्देश दिया था। पहले मई 2021 और बाद में जून तक का समय तय किया गया था। लेकिन, वर्तमान में जो स्थिति है, उससे जून तक भी निर्माण कार्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। जानकारों की माने तो जून तक इसका निर्माण पूरा नहीं हुआ तो यह परियोजना फिर एक साल पीछे चली जाएगी। वजह जून से बाढ़-बरसात का मौसम शुरू हो जाएगा और इसके चलते निर्माण की प्रक्रिया बाधित हो जाएगी।

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    बताते चलें कि बागमती पुरानी धार की धाराओं में बदलाव कर डैम का निर्माण कर बाढ़ की तबाही का कारण बने पानी को अमृत बना किसानों की खेतों तक पानी पहुंचाने की बेलवाघाट डैम निर्माण की योजना को स्वीकृति दी गई थी। 95 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 27 एकड़ भूमि लीज नीति के तहत अधिग्रहण की गई । एचसीएल कंपनी को निर्माण की जिम्मेदारी मिली। वर्ष 2019 में ही डैम का निर्माण पूर्ण करने का समय तय किया गया था। लेकिन बाढ़ के चलते निर्माण अधूरा रह गया। बाढ़ के बाद निर्माण एजेंसी द्वारा मंद रफ्तार से रूक-रूक कर काम कराया जाता रहा।

    19 नवंबर 2020 को तत्कालीन डीएम ने मौके पर पहुंच कर खुद स्थिति का जायजा लिया था। वहीं निर्माण एजेंसी के कर्मियों को फटकार लगाई थी। इसके बाद निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ी थी। लेकिन वर्तमान में निर्माण की रफ्तार काफी धीमी है। अगर समय पर यह परियोजना पूरी हो जाती तो किसानों को न केवल बाढ़ की तबाही से मुक्ति मिलती, बल्कि किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचता। इस डैम के निर्माण से किसानों की दशकों से चली आ रही परेशानी का स्थायी समाधान हो जाता।