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मुजफ्फरपुर की बेटी सुरभि ने रचा इतिहास, बिना कोचिंग तीसरे प्रयास में बनीं DSP

Published: Wed, 04 Nov 2026 11:40 AM (IST)

Bihar Police DSP: सुरभि कुमारी ने बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में डीएसपी पद पर चयनित होकर मुजफ्फरपुर का ...और पढ़ें

लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सुरभि का डीएसपी के पद पर चयन।

लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सुरभि का डीएसपी के पद पर चयन।  

HighLights

  1. सुरभि कुमारी का बिहार बीपीएससी में डीएसपी पद पर चयन।

  2. बिना कोचिंग के सेल्फ-स्टडी से हासिल की बड़ी सफलता।

  3. तीसरे प्रयास में मिली यह उपलब्धि, बनीं प्रेरणास्रोत।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । हौसले बुलंद हो तो संसाधनों की कमी आड़े नहीं आती। इसे सच कर दिखाया है एक शिक्षक की बेटी सुरभि कुमारी ने। इस साल बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सुरभि का चयन डीएसपी के पद पर हुआ है।

शहर के चंदवारा निवासी सुरभि कुमारी के पिता संजय कुमार प्राइवेट टीचर हैं। माता किरण देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद सुरभि ने कभी हार नहीं मानी।

शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रही। सीबीएसई दिल्ली बोर्ड से मैट्रिक में 95 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद बीआरए बिहार विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक किया, जिसमें उन्हें 65 प्रतिशत अंक मिले।

तीसरा प्रयास, पहली बड़ी सफलता

सुरभि ने बताया कि यह उनका बीपीएससी का तीसरा प्रयास था। इससे पहले दो बार असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इस बार पहली बार उन्होंने एक साथ पीटी, मेंस और इंटरव्यू क्लियर कर सीधे डीएसपी पद पर चयनित होकर दिखा दिया।

सबसे बड़ी बात यह है कि सुरभि ने यह सफलता बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान की मदद के हासिल की है। उसने कहा, मैंने अपना पीसीएस बिना किसी नामी इंस्टीट्यूट की मदद के क्लियर किया है।

सेल्फ स्टडी और भगवान पर भरोसा करती हूं। सुरभि अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और मां और परिवार को देती हैं। उन्होंने कहा कि मेरे पिता और मां ने मुझे लक्ष्य हासिल करने में बहुत मदद की।

परिवार के सदस्यों का हमेशा से भरपूर सहयोग मिला। पिता खुद प्राइवेट टीचर होने के कारण हमेशा पढ़ाई के महत्व को समझते थे और बेटी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे।

सुरभि की सफलता आज बेटियों के लिए मिसाल बन गई है। कम आय वाले परिवार से निकलकर, बिना कोचिंग के, सिर्फ मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर वर्दी हासिल करना हर किसी के बस की बात नहीं। उनकी कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं। अभी वह प्रशिक्षण ले रही है जल्द ही उनकी पोस्टिंग होगी।

बेटियां अब किसी की मोहताज नहीं रहीं। अपनी प्रतिभा के बल पर मनचाहा मुकाम हासिल कर रही है। स्वतंत्र होकर समाज के हर क्षेत्र में अपनी प्रतिमा का डंका बजा रही है। अपनी सफलता से वह परिवार के नाम को गौरवान्वित कर रही है।

- डा. अमृता प्रीतम, एसोसिएट प्रोफेसर, एसकेएमसीएच

बेटियां प्रतिभा के बल पर आसमान की ऊंचाइयों को छू रही हैं। आब माता-पिता को बेटी के जन्म पर चिंता नहीं होती बल्कि गर्व महसूस होता है। वे अब बेटों की तरह बेटियों को आगे बढ़ने में मदद करते है। बेटियों की सफलता पर उनको गर्व होता है।
- डा. शालिनी, चिकित्सक, एसकेएमसीएच

खेल का मैदान में मेडल जीतना हो या फिर सीमा पर तैनात होकर देश की सुरक्षा बेटियां बढ़-चढ़कर भाग ले रही है। डाक्टर एवं इंजीनियर बनकर अपने मां-बाप का सहारा बन रही है। बेटियों को लेकर अब परिवार एवं समाज का सोच बदल चुका है।
- डा. प्रीति सिंह, चिकित्सक

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