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युवाओं के लिए मिसाल बनीं बिहार की निशा, दारोगा बनने के बाद BPSC में लहराया परचम

Published: Tue, 03 Nov 2026 06:04 PM (IST)

बगहा की निशा कुमारी ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में ग्रामीण विकास पदाधिकारी (आरडीओ) बनकर अपने किसान परिवार और क्षेत्र का ...और पढ़ें

साक्षात्कार के बाद बीपीएससी परिसर में निशा। सौजन्य: स्वयं

साक्षात्कार के बाद बीपीएससी परिसर में निशा। सौजन्य: स्वयं 

HighLights

  1. निशा कुमारी 70वीं बीपीएससी में ग्रामीण विकास पदाधिकारी बनीं।

  2. किसान परिवार की बेटी ने दारोगा पद से आगे बढ़कर सफलता पाई।

  3. बगहा की निशा ने अपनी मेहनत से परिवार का मान बढ़ाया।

संदीप चित्रांश, बगहा (पश्चिम चंपारण)। सपने बड़े हों और हौसला बुलंद तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। बगहा की निशा कुमारी ने पहले दारोगा बनकर अपनी प्रतिभा साबित की और अब 70वीं BPSC परीक्षा में आरडीओ पद पर चयनित होकर युवाओं के सामने सफलता की नई मिसाल पेश की है।

बेटियां किसी परिवार की जिम्मेदारी नहीं, उसकी सबसे बड़ी ताकत होती हैं। इस बात को बगहा की निशा कुमारी ने अपनी सफलता से साबित कर दिया है। चार बेटियों वाले एक साधारण किसान परिवार की निशा ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में ग्रामीण विकास पदाधिकारी (आरडीओ) के पद पर चयनित होकर न केवल माता-पिता का सपना पूरा किया, बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

इस दीपावली निशा की सफलता ने परिवार के आंगन में खुशियों का ऐसा दीप जलाया है, जिसकी रोशनी समाज की दूसरी बेटियों तक भी पहुंच रही है। निशा की सफलता के पीछे किसी संपन्न परिवार की आर्थिक ताकत नहीं, बल्कि माता-पिता का त्याग, विश्वास और उनकी वर्षों की मेहनत है।


बगहा नगर के काली स्थान रोड, वार्ड संख्या 28 निवासी उनके पिता प्रदीप कुमार गुप्ता छोटे किसान हैं। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए वह कपड़े की छोटी दुकान भी चलाते हैं। दादा शालिग्राम प्रसाद भी किसान होने के साथ पीडीएस दुकानदार हैं। सीमित आमदनी के बावजूद परिवार ने बेटियों की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी।

चार बहनों में दूसरे स्थान पर है निशा

निशा चार बहनों में दूसरे स्थान पर है। परिवार में कोई बेटा नहीं है, लेकिन पिता प्रदीप कुमार को इसका कभी मलाल नहीं रहा। उनका कहना है कि चारों बेटियों ने कभी बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी। अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्होंने बेटियों को बेहतर शिक्षा देने और उनके सपनों को पूरा करने का प्रयास किया। आज निशा की सफलता उनके इसी विश्वास और संघर्ष का परिणाम है।

निशा की प्रतिभा स्कूली दिनों से ही सामने आने लगी थी। बगहा में दसवीं तक की पढ़ाई के दौरान वह टापर रहीं। उन्हें इस उपलब्धि पर जिला स्तर पर भी सम्मानित किया गया था।

इसके बाद मुजफ्फरपुर से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना लेकर उन्होंने पटना में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। परिवार से दूर रहकर सीमित संसाधनों में लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं।

पहले प्रयास में बनी थीं दारोगा

निशा की मेहनत का परिणाम पहले ही प्रयास में सामने आया। उनका चयन बिहार पुलिस में दारोगा के पद पर हुआ। सीतामढ़ी के नगर थाना में उन्होंने करीब सात महीने तक सेवा भी दी। लेकिन प्रशासनिक सेवा में आगे बढ़ने की इच्छा ने उन्हें तैयारी जारी रखने के लिए प्रेरित किया।

मां ममता देवी बेटी की उपलब्धि पर गर्व महसूस करती हैं। उनका कहना है कि बेटियों को पढ़ाने और आगे बढ़ाने के लिए परिवार ने कई कठिनाइयां झेलीं, लेकिन उनकी शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया।

निशा की बड़ी बहन की शादी हो चुकी है, जबकि दोनों छोटी बहनें पटना में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। माता-पिता को उम्मीद है कि वे भी अपनी मेहनत से सफलता हासिल करेंगी।

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आज की बेटियां किसी से कम नहीं हैं। यदि उन्हें सही मार्गदर्शन और आगे बढ़ने का अवसर मिले तो वे सफलता की हर सीढ़ी पार कर अपनी मंजिल हासिल कर सकती हैं। रास्ते में कितनी भी चुनौतियां और कठिनाइयां क्यों न आएं, उनका हौसला उन्हें सफलता तक पहुंचा ही देता है। बगहा की बेटी निशा कुमारी ने अपनी उपलब्धि से हम सभी का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

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रश्मि रंजन, उप सभापति

बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं। बस जरूरत है उन्हें प्यार, विश्वास और आगे बढ़ने का समान अवसर देने की। जब बेटियों को परिवार और समाज का साथ मिलता है तो वे अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल कर सकती हैं।

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ज़रीना खातून, पूर्व सभापति

बेटियों की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि यह पूरे समाज की सोच और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। आज बेटियां अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा से हर क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर रही हैं।

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कुमारी बंदया वर्मा

बेटियां परिवार की सबसे बड़ी ताकत और समाज का गौरव होती हैं। आज की बेटियां अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से हर क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा रही हैं। बगहा की निशा कुमारी ने अपनी उपलब्धि से यह साबित कर दिया है।

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पुष्पा गुप्ता, सभापति

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