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दरभंगा में कपड़े की छोटी-सी दुकान से DSP की कुर्सी तक पहुंची बिहार की बेटी, ग्रामीण बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

Published: Sun, 01 Nov 2026 05:07 PM (IST)

Women Success Story : दरभंगा के ब्रह्मपुर की सीमा कुमारी ने सीमित संसाधनों के बावजूद 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 116वां ...और पढ़ें

Rural Girls Inspiration : दरभंगा के ब्रह्मपुर की सीमा कुमारी।

Rural Girls Inspiration : दरभंगा के ब्रह्मपुर की सीमा कुमारी।

संवाद सहयोगी, कुशेश्वरस्थान (दरभंगा)। DSP Success Story : कपड़े की छोटी सी दुकान, सीमित आमदनी और ग्रामीण परिवेश... इन चुनौतियों को पीछे छोड़ ब्रह्मपुर की बेटी सीमा कुमारी ने सफलता की ऐसी इबारत लिखी है, जिसने पूरे गांव का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

ब्रह्मपुर कटवारा निवासी कपड़ा व्यवसायी परमेश्वर साह और शीला देवी की बेटी सीमा ने पहले ही प्रयास में 70 वां बीपीएससी परीक्षा में 116वां रैंक हासिल कर डीएसपी का पद प्राप्त किया है। वर्तमान में वह राजगीर में डीएसपी की ट्रेनिंग कर रही हैं। सीमा की इस उपलब्धि से परिवार के साथ पूरा गांव गौरवान्वित है।

सीमा की सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने किसी बड़े शहर या सुविधासंपन्न परिवार से निकलकर नहीं, बल्कि गांव की साधारण पृष्ठभूमि से उठकर यह मुकाम हासिल किया है।

पिता परमेश्वर साह गांव में कपड़े की छोटी सी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने पत्नी शीला देवी के साथ बच्चों की पढ़ाई में कभी आर्थिक तंगी को आड़े नहीं आने दिया। माता-पिता ने बेटों के साथ बेटी की शिक्षा को भी बराबर महत्व दिया और उसे आगे बढ़ने का पूरा अवसर दिया।

गांव के स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई, नवोदय ने बदली दिशा

सीमा की प्रारंभिक शिक्षा गांव के विद्यालय में हुई। पढ़ाई के प्रति लगन ने उन्हें जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में सफलता दिलाई। इसके बाद नवोदय विद्यालय से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।

दरभंगा से स्नातक करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी का लक्ष्य तय किया और तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं। वहां लगातार मेहनत और अनुशासन के साथ तैयारी करते हुए उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में बीपीएससी परीक्षा में 116 वां स्थान प्राप्त कर लिया।

बेटी की सफलता ने बदल दी पिता की पहचान

परमेश्वर साह के दो बेटे और एक बेटी हैं। बड़े बेटे ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उत्तराखंड में निजी कंपनी में नौकरी शुरू की।

छोटे बेटे ने नेवी की नौकरी छोड़कर गांव लौटकर पिता के कारोबार को संभाल लिया। वहीं सबसे छोटी संतान सीमा ने अपनी सफलता से परिवार की पहचान को नई ऊंचाई दी है।

परमेश्वर साह कहते हैं कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उनकी बेटी पुलिस की वर्दी पहनकर गांव और परिवार का नाम रोशन करेगी। बेटी की सफलता उनके लिए जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

ग्रामीण परिवेश में बेटियों को लेकर मौजूद संकीर्ण सोच के बीच सीमा की कामयाबी यह संदेश भी देती है कि अवसर और परिवार का सहयोग मिले तो बेटियां किसी भी ऊंचाई को हासिल कर सकती हैं।

सीमा की सफलता ने ब्रह्मपुर ही नहीं, पूरे क्षेत्र की बेटियों में नई उम्मीद जगाई है। गांव की साधारण बेटी का डीएसपी बनना अब क्षेत्र में बेटियों की शिक्षा और उनके सपनों को पंख देने वाली प्रेरक मिसाल बन गया है।

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