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बेटियों के लिए प्रेरणा, बेतिया की कंचन बाला श्री बनीं बिहार पुलिस में दारोगा

Published: Sun, 01 Nov 2026 04:26 PM (IST)

बेतिया की कंचन बाला श्री ने अपनी मेहनत, लगन और परिवार के सहयोग से बिहार पुलिस में दारोगा बनकर एक ...और पढ़ें

थाने में ड्यूटी पर कंचन बाला श्री। सौ. स्वयं

थाने में ड्यूटी पर कंचन बाला श्री। सौ. स्वयं 

HighLights

  1. कंचन बाला श्री ने मेहनत से बिहार पुलिस में दारोगा पद पाया।

  2. आठ भाई-बहनों में सबसे छोटी, परिवार के भरोसे से बढ़ीं।

  3. बेटियों को आत्मनिर्भर बनने और सपने पूरे करने का दिया संदेश।

संदेश तिवारी, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। बेटियों को भी अगर बेटों की तरह आगे बढ़ने का अवसर और परिवार का भरोसा मिले तो वे अपनी प्रतिभा से सफलता की नई इबारत लिख सकती हैं।

नगर के पीयूनी बाग निवासी कंचन बाला श्री इसकी मिसाल हैं। आठ भाई-बहनों में सबसे छोटी कंचन ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर बिहार पुलिस में दारोगा बनकर न केवल अपनी अलग पहचान बनाई, बल्कि परिवार को भी गौरवान्वित किया।

उनकी कहानी बताती है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं। जरूरत है तो बस उन्हें अपने सपनों को पूरा करने का अवसर देने की। कंचन के पिता स्वर्गीय रामचंद्र राही शिक्षक थे।

उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा में कभी बेटा और बेटी के बीच अंतर नहीं किया। उनका मानना था कि बेटियां भी पढ़-लिखकर अपनी मंजिल हासिल कर सकती हैं। परिवार से मिले इसी प्रोत्साहन ने कंचन के आत्मविश्वास को मजबूत किया। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा संत टेरेसा गर्ल्स हाई स्कूल से पूरी की। इसके बाद पटना साइंस कॉलेज से गणित विषय में एमएससी की पढ़ाई की।

उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने बिहार पुलिस में दारोगा बनने का लक्ष्य तय किया और खुद तैयारी में जुट गईं। वर्ष 2022 में उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन बिहार पुलिस में दारोगा के पद पर हो गया। वह वर्तमान में बक्सर में पदस्थापित हैं।

मेहनत और आत्मविश्वास से मिली मंजिल

कंचन की सफलता के पीछे निरंतर मेहनत और खुद पर भरोसा रहा है। उन्होंने अपनी पढ़ाई और तैयारी के दौरान लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकने दिया। गणित जैसे विषय में परास्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पुलिस सेवा में जाने का उनका निर्णय उनकी लगन और कुछ अलग करने की इच्छा को दर्शाता है। आज वह बिहार पुलिस में दारोगा के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।

मां का आशीर्वाद बना सबसे बड़ा संबल

कंचन की सफलता की कहानी में उनकी मां जयश्री देवी का विशेष योगदान है। उन्होंने हर परिस्थिति में बेटी का हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कंचन अपनी उपलब्धि का श्रेय मां के आशीर्वाद, पिता के संस्कार और परिवार के सहयोग को देती हैं। उनका मानना है कि परिवार का विश्वास बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है।

बेटियां अपनी क्षमता पहचानें, सपनों को दें उड़ान

कंचन का मानना है कि बेटियों की क्षमता का आकलन उनके लड़की होने के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, प्रतिभा और आत्मविश्वास से होना चाहिए। बेटियों को भी अपनी पसंद का लक्ष्य चुनने और उसे हासिल करने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। वह चाहती हैं कि लड़कियां सामाजिक बंदिशों और परिस्थितियों से घबराकर अपने सपनों को अधूरा न छोड़ें।

मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो और मंजिल पाने का जुनून तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। बेटियां आत्मनिर्भर बनें, अपनी पहचान बनाएं और परिवार के साथ समाज का भी गौरव बढ़ाएं।

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