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दरभंगा में पिता के संघर्ष को बेटियों ने बनाया अपनी ताकत, वर्दी में चमक रहीं मछैता की दो बहनें

Published: Sat, 31 Oct 2026 06:00 AM (GMT+05:30)

दरभंगा के मछैता गांव की लाडली और साक्षी कुमारी ने सीमित संसाधनों के बावजूद बिहार पुलिस और होमगार्ड में चयनित होकर अपने माता-पिता का गौरव बढ़ाया है।

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अपने पिता राजकुमार झा को पगड़ी पहना खुशी व्यक्त करती उनकी बेटी लाडली। सौजन्य-स्वजन

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अपने पिता राजकुमार झा को पगड़ी पहना खुशी व्यक्त करती उनकी बेटी लाडली। सौजन्य-स्वजन

HighLights

  1. मछैता की लाडली और साक्षी ने पाई पुलिस में सफलता।

  2. सीमित संसाधनों के बावजूद बनीं बिहार पुलिस का हिस्सा।

  3. पिता राजकुमार झा का सपना हुआ साकार, समाज को प्रेरणा।

संवाद सहयोगी, तारडीह (दरभंगा)। हर माता-पिता का यह सपना होता है कि उनकी पहचान उनकी संतानों के नाम और कर्मों से बने। जब यही गौरव बेटियां अपने संघर्ष और मेहनत से दिलाती हैं, तो न केवल परिवार बल्कि पूरा समाज गर्व से सिर उठाकर जीता है।

दरभंगा जिला अंतर्गत तारडीह प्रखंड के मछैता गांव की दो बेटियों लाडली कुमारी और साक्षी कुमारी ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर हौसलों में जान हो, तो सीमित साधन भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकते।

संघर्ष की पृष्ठभूमि और पिता का संकल्प

मछैता के राजकुमार झा पेशे से साधारण किसान और मजदूर हैं। परिवार की माली हालत ऐसी नहीं थी कि सुख-सुविधाओं की कोई गारंटी हो, लेकिन पत्नी सुभिता देवी और राजकुमार झा ने कभी अपनी बेटियों की शिक्षा से समझौता नहीं किया।

अभावों से जूझते हुए भी उन्होंने अपने तीनों बेटियों और एक बेटे को बेहतर शैक्षणिक माहौल दिया। खुद कष्ट सहे, आर्थिक तंगी का साया बच्चों की पढ़ाई पर नहीं पड़ने दिया और सदैव यही सीख दी कि शिक्षा ही वह हथियार है जो भाग्य की लकीरें बदल सकती है।

रुढ़ियों की दीवार तोड़कर खाकी का सम्मान

ग्रामीण परिवेश में आज भी बेटियों को लेकर कई संकीर्ण धारणाएं हावी रहती हैं। घर की दहलीज से बाहर निकलकर पुलिस बल जैसी चुनौतीपूर्ण सेवा में जाना आसान नहीं था।

पिता राजकुमार झा स्वयं स्वीकारते हैं कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि उनकी बेटियां समाज की बंदिशों को पीछे छोड़ते हुए पुलिस की वर्दी पहनकर उनका नाम रोशन करेंगी।

बड़ी बेटी लाडली कुमारी बिहार पुलिस सिपाही में बहाल होकर किशनगंज में अपनी सेवा दे रही हैं, तो वहीं छोटी बेटी साक्षी कुमारी होमगार्ड में बहाल होकर दरभंगा कारागार में पदस्थापित हैं।

समाज के लिए नई प्रेरणा

दीक्षांत परेड के मंच पर जब वर्दी में सजी बेटी अपने पिता के सिर पर सम्मान की टोपी पहनाती है, तो वह दृश्य वर्षों के पसीने और तपस्या का सार्थक परिणाम बन जाता है।

राजकुमार झा को तीन लड़की व एक लड़का है। इनकी बडी बेटी लाडली कुमारी 2025 की बिहार पुलिस की सिपाही बहाली परीक्षा में सफल हुई थी।

वहीं छोटी बेटी साक्षी ने भी उसी वर्ष बिहार होमगार्ड की परीक्षा पास की। अभी किसी भी बच्चे की शादी नहीं हुई है। राजकुमार झा की बड़ी बेटी लाडली पीजी कर ली है।

मंझली बेटी तुलसी स्नातक पास है। छोटी बेटी साक्षी बीए पार्ट टू में है और पुत्र ईश्वर कुमार बीसीए थर्ड पार्ट में है। उनकी शिक्षा दीक्षा दसवीं तक स्थानीय स्तर पर गांव के सरकारी विद्यालय में हुई। कालेज की पढ़ाई दरभंगा से की। सिपाही बहाली के लिए पटना में रहकर तैयारी की।

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