2003 से बंद खदानें खुलने की जगी उम्मीद! मुंगेर की पहाड़ियों में है टाइल्स बनाने वाला क्वार्ट्जाइट, गुजरात से आ रहा पत्थर
मुंगेर की पहाड़ियों में प्रचुर मात्रा में क्वार्ट्जाइट पत्थर होने के बावजूद वन कानूनों के कारण 2003 से खनन रुका ...और पढ़ें

मुंगेर के पहाड़ से निकले पत्थर में क्वार्टजाइट. जागरण
HighLights
मुंगेर में क्वार्ट्जाइट पत्थर का अकूत भंडार मौजूद।
वन कानूनों के कारण 2003 से खनन बंद पड़ा।
प्रशासनिक पहल से टाइल्स उद्योग फिर से शुरू होगा।
संवाद सहयोगी, मुंगेर। Munger Stone Tiles: मुंगेर की पहाड़ियों में प्राकृतिक पत्थरों का अकूत भंडार होने के बावजूद लंबे समय से पत्थर उद्योग अपनी अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सका है।
ऋषिकुंड और धरहरा क्षेत्र की पहाड़ियों में उच्च कोटि का क्वार्ट्जाइट पत्थर पाया जाता है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और वन अधिनियम से जुड़े जटिल प्रावधानों के कारण वर्ष 2003 के बाद से वन क्षेत्र में स्थित खदानों से पत्थर का उत्खनन पूरी तरह बंद है।
मुंगेर के ऋषिकुंड और धरहरा क्षेत्र की पहाड़ियों में क्वार्ट्जाइट पत्थरों का प्रचुर भंडार, लेकिन वन कानूनों के कारण वर्ष 2003 से उत्खनन बंद
खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अवनीश कुमार सिंह के निर्देश पर वन और गैर-वन क्षेत्र का सर्वे कराकर भेजी गई रिपोर्ट
प्रशासनिक स्तर पर वन क्षेत्र के नियमों में बदलाव कर पत्थर खदानों को फिर से चालू करने और टाइल्स उद्योग लगाने पर विचार
जिला खनन पदाधिकारी गोपाल प्रसाद सिंह का बयान: पूर्व में क्वार्ट्जाइट खनन के लिए ही जारी हुई थीं अनुज्ञप्तियां, उद्योग शुरू होने से बढ़ेंगे रोजगार
स्थिति यह है कि बाजार में ग्रेनाइट और टाइल्स की मांग पूरी करने के लिए व्यवसायियों को बाहरी राज्यों जैसे गुजरात पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हालांकि, अब बंद पड़े पत्थर उद्योगों को दोबारा पटरी पर लाने और मुंगेर को टाइल्स उत्पादन का प्रमुख केंद्र (हब) बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सुगबुगाहट तेज हो गई है।
खान विभाग ने मांगी सर्वे रिपोर्ट; क्वार्ट्जाइट से टाइल्स निर्माण की जगी मजबूत उम्मीद
राज्य सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अवनीश कुमार सिंह के निर्देश के बाद जिले के वन क्षेत्र और गैर-वन क्षेत्र का विस्तृत सर्वे कराकर रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी गई है। वन क्षेत्र के नियमों में आवश्यक संशोधन कर पत्थर उद्योग को दोबारा चालू करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
जिला खनन पदाधिकारी गोपाल प्रसाद सिंह ने बताया कि जिले के सभी पत्थर खदान संचालकों को पूर्व में क्वार्ट्जाइट उत्खनन के लिए ही माइनिंग प्लान के तहत अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) जारी की गई थी।
मुंगेर के पहाड़ों के पत्थरों में क्वार्ट्जाइट की मात्रा अत्यधिक होने के कारण इसका उपयोग सीधे तौर पर टाइल्स बनाने में किया जा सकता है। यदि यह पहल सफल होती है, तो मुंगेर देश के मानचित्र पर टाइल्स उत्पादन के एक बड़े हब के रूप में उभर सकता है।
क्वार्ट्जाइट और ग्रेनाइट में अंतर; प्रसंस्करण उद्योगों से स्थानीय स्तर पर मिलेंगे रोजगार
विशेषज्ञों के अनुसार, क्वार्ट्जाइट एक रूपांतरित चट्टान है जबकि ग्रेनाइट आग्नेय चट्टान है। हालांकि दोनों बेहद टिकाऊ प्राकृतिक पत्थर हैं, लेकिन क्वार्ट्जाइट का उपयोग फर्श, दीवारों और सजावटी निर्माण कार्यों में प्रमुखता से होता है।
स्थानीय स्तर पर इन पत्थरों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण, गुणवत्ता परीक्षण और प्रसंस्करण (Processing) इकाइयों की स्थापना से कटाई, पॉलिश, परिवहन और बिक्री के क्षेत्र में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों अवसर पैदा हो सकते हैं।
वन व पर्यावरण विभाग की हरी झंडी मिलने के बाद स्थानीय संसाधनों का यह नियोजित उपयोग मुंगेर की आर्थिकी को एक नई मजबूती प्रदान करेगा।
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"जिले में बंद पड़े पत्थर उद्योग को दोबारा चालू करने में वन विभाग के जटिल नियम आड़े आ रहे हैं, जिसे दूर करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास जारी हैं। सर्वे रिपोर्ट भेज दी गई है। यदि उद्योग चालू होता है, तो व्यवसायी यहां के क्वार्ट्जाइट पत्थर से उच्च कोटि की टाइल्स का निर्माण कर सकेंगे।"
