मुंगेर की पहाड़ियों में 1500 साल पुराने इतिहास की तलाश, इंग्लैंड-जापान के वैज्ञानिक पहुंचे , रहस्य से उठेगा पर्दा
Munger Dharhara Archaeological Survey Bihar Heritage Development Society: मुंगेर के धरहरा की दुर्गम पहाड़ियों में 1500 वर्ष पुराने ऐतिहासिक अवशेषों की वैज्ञानिक पड़ताल शुरू हो गई है।

मुंगेर के धरहरा की पहाड़ियों में पुरातात्विक स्थलों का निरीक्षण करते इंग्लैंड और जापान से आए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ|
HighLights
धरहरा की पहाड़ियों में 1500 वर्ष पुराने अवशेषों की जांच।
अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण।
दुर्लभ काले पत्थरों और गौतम बुद्ध से जुड़ी मान्यताएं मिलीं।
संवाद सहयोगी, धरहरा (मुंगेर)। बिहार के मुंगेर जिले अंतर्गत धरहरा की दुर्गम पहाड़ियों और सीमावर्ती गांवों में दबे करीब 1500 वर्ष पुराने गौरवशाली इतिहास के अवशेषों की वैज्ञानिक पड़ताल शुरू हो गई है। शुक्रवार को देश-विदेश के प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्व विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय टीम ने धरहरा के पैसरा, खोपावर, बंगलवा, माताडीह और कोल काली क्षेत्रों का सघन स्थलीय निरीक्षण किया।
मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड अंतर्गत पहाड़ियों व गांवों में छिपे 1500 वर्ष पुराने ऐतिहासिक अवशेषों की जांच करने पहुंची अंतरराष्ट्रीय टीम
बिहार हेरिटेज डेवलपमेंट सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक प्रो. अनिल कुमार के नेतृत्व में इंग्लैंड और जापान के विशेषज्ञों ने किया सर्वेक्षण
पैसरा, खोपावर, बंगलवा, माताडीह और कोल काली क्षेत्र में पुरातात्विक संभावनाओं, काले पत्थरों व भौगोलिक संरचना का लिया जायजा
स्थानीय लोगों द्वारा भगवान बुद्ध की तपस्या से जुड़ी जानकारी भी रखी गई; वैज्ञानिक अध्ययन और दस्तावेजीकरण से खुलेंगे कई राज
टीम ने अलग-अलग ऐतिहासिक स्थलों का सूक्ष्मता से जायजा लेते हुए वहां मौजूद पुरातात्विक संकेतों, भौगोलिक संरचनाओं और प्राचीन साक्ष्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं। निरीक्षण के दौरान पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों ने धरहरा के इस पूरे क्षेत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर करार दिया।
वैज्ञानिकों ने क्षेत्र की पहाड़ियों में दुर्लभ काले पत्थरों के मिलने की प्रबल संभावना जताई है, जिनका उपयोग प्राचीन काल में मूर्तियों और संरचनाओं के निर्माण में होता था। इसके साथ ही, स्थानीय ग्रामीणों ने गौतम बुद्ध द्वारा धरहरा क्षेत्र में तपस्या किए जाने से जुड़ी प्रचलित मान्यताओं और लोककथाओं की जानकारी भी विशेषज्ञों के समक्ष रखी। हालांकि, वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि इसकी आधिकारिक पुष्टि व्यवस्थित पुरातात्विक शोध और उत्खनन के बाद ही हो पाएगी।
ब्रिटेन व जापान से पहुंचे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ, स्थानीय साक्ष्यों का किया अध्ययन
इस अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ दल का कुशल नेतृत्व बिहार हेरिटेज डेवलपमेंट सोसाइटी (BHDS) के कार्यकारी निदेशक प्रो. अनिल कुमार कर रहे थे। दल में इंग्लैंड के विख्यात इतिहासकार प्रो. मैक्स डीग, टोक्यो यूनिवर्सिटी (जापान) की डा. साक्षी अहलावत, डा. सप्तऋषि चौधरी तथा सुश्री तिष्य घोष विशेष रूप से शामिल थीं।
इस टीम ने स्थानीय चंद्रचूड़ साक्षी के साथ मिलकर पहाड़ी इलाकों का पैदल भ्रमण किया। विशेषज्ञों ने स्थानीय परंपराओं, लोक कथाओं और ग्रामीणों से मिले तथ्यों को धरातल पर मिले पुरातात्विक अवशेषों से जोड़कर देखने का प्रयास किया।
वैज्ञानिक सर्वेक्षण से उजागर होंगे अतीत के पन्ने, इलाके में जगी उम्मीदें
विशेषज्ञों के इस हाई-प्रोफाइल दौरे का मुख्य उद्देश्य संभावित प्राचीन धरोहरों की सटीक पहचान करना, उनका वैज्ञानिक अध्ययन करना और विस्तृत दस्तावेजीकरण तैयार करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में व्यवस्थित सर्वेक्षण और पुरातात्विक उत्खनन कराया जाता है, तो मुंगेर और धरहरा के अतीत से जुड़े कई ऐसे अनछुए अध्याय और सभ्यता के अवशेष दुनिया के सामने आ सकते है।
जो अब तक इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं हो सके हैं। इस दौरे के बाद स्थानीय नागरिकों में क्षेत्र के पर्यटन व ऐतिहासिक मानचित्र पर उभरने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।
