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मुंगेर में ग्रीनफील्ड फोरलेन के भूमि अधिग्रहण में बड़ा खुलासा, 12 एकड़ सरकारी जमीन की निजी जमाबंदी, मुआवजे पर रोक

Published: Wed, 04 Nov 2026 07:28 AM (IST)

मुंगेर में ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना के भूमि अधिग्रहण के दौरान 12 एकड़ सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी का बड़ा खुलासा ...और पढ़ें

मुंगेर में फोरलेन निर्माण और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी फाइलें व नक्शे की प्रतीकात्मक तस्वीर ।

मुंगेर में फोरलेन निर्माण और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी फाइलें व नक्शे की प्रतीकात्मक तस्वीर ।

HighLights

  1. मुंगेर में 12 एकड़ सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी।

  2. ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना भूमि अधिग्रहण में खुलासा।

  3. फर्जीवाड़े के कारण मुआवजे के भुगतान पर रोक।

मनोज कुमार, जागरण, मुंगेर। बिहार के मुंगेर जिले में सरकारी जमीन पर अवैध जमाबंदी और फर्जीवाड़े का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सदर प्रखंड के नौवागढ़ी में साढ़े चार एकड़ सरकारी जमीन की जमाबंदी का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब धरहरा प्रखंड में 12 एकड़ (लगभग 4.86 हेक्टेयर) सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी का एक बड़ा खुलासा हुआ है।

सबसे हैरानी की बात यह है कि सरकारी खतियान में दर्ज इस जमीन पर न केवल निजी जमाबंदी कर ली गई थी, बल्कि रैयतों के नाम से नियमित रूप से राजस्व रसीद भी काटी जा रही थी। यह पूरा सनसनीखेज मामला बहुचर्चित मुंगेर-मोकामा ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण के दौरान दस्तावेजों की स्क्रूटनी के वक्त सामने आया है।

कागजातों की जांच में खुली पोल, 36 रैयतों के मिले संदिग्ध दस्तावेज

धरहरा के चौर दीग्गर मौजा में सिंघिया रोड से धरहरा रोड के बीच फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीनों के कागजातों की जब प्रशासनिक स्तर पर जांच की गई, तो बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। सरकारी खतियान से मिलान करने पर 36 रैयतों के जमीन संबंधी कागजात सरकारी जमीन के दायरे में पाए गए।

इनमें से लगभग पांच एकड़ जमीन ऐसी थी, जिसकी अवैध रूप से जमाबंदी कायम कर ली गई थी और अंचल कार्यालय से धड़ल्ले से राजस्व रसीद भी जारी की जा रही थी। अब इन्हीं फर्जी रसीदों और दस्तावेजों के आधार पर संबंधित रैयत भू-अर्जन विभाग से भारी-भरकम मुआवजे की मांग कर रहे थे।

मामला तूल पकड़ने के बाद जिला भू-अर्जन कार्यालय ने तत्काल प्रभाव से इस जमीन के मुआवजे के भुगतान की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है और धरहरा अंचलाधिकारी से जमीन की वास्तविक प्रकृति, जमाबंदी के आधार और आदेश की कॉपी मांगी है।

हालांकि, 15 दिन बीत जाने के बाद भी अंचल कार्यालय से कोई जवाब नहीं मिला है, जिससे फोरलेन निर्माण के लिए जमीन हस्तांतरण का काम भी प्रभावित हो रहा है।

बड़े प्रशासनिक और नीतिगत सवाल:

इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी आखिर किस अंचलाधिकारी या कर्मचारी के कार्यकाल में हुई?

  • बिना किसी पुख्ता और वैध कागजात के सरकारी भूमि को निजी खाते में कैसे और किस आधार पर दर्ज किया गया?

  • सरकारी और गैर-मजरुआ जमीन के नाम पर राजस्व रसीद किसकी मिलीभगत से और कैसे काटी जा रही थी?

  • अवैध जमाबंदी के आधार पर मुआवजे की अनुचित मांग करने वाले लोगों की क्या जवाबदेही तय होगी?

  • पिछले 15 दिनों से मांगी गई रिपोर्ट अंचल कार्यालय में क्यों लंबित पड़ी हुई है?

1400 रैयतों की जमीन का होना है अधिग्रहण

जिला भू-अर्जन पदाधिकारी पंकज गुप्ता ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि मुंगेर जिले में ग्रीनफील्ड फोरलेन के लिए 17.2 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण के मद्देनजर कुल 1400 रैयतों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।

धरहरा के चौर दियारा क्षेत्र में जब दस्तावेजों का मिलान किया गया, तब सरकारी जमीन पर निजी जमाबंदी और रसीद कटने का मामला उजागर हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे संदिग्ध मामलों में मुआवजा भुगतान के लिए नोटिस जारी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है और सीओ को स्पष्ट रिपोर्ट देने को कहा गया है।

दूसरी ओर, धरहरा के अंचलाधिकारी (CO) वीरेंद्र कुमार का कहना है कि सरकारी जमीन की जमाबंदी कब और किस आधार पर हुई, इसकी जानकारी मांगी गई है।

वर्तमान में राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल के कारण जमाबंदी पंजी और संबंधित पुराने अभिलेखों की जांच नहीं हो पा रही है। हड़ताल समाप्त होने के बाद अभिलेखों की जांच और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लेकर ही स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी।

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