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बूंद-बूंद पानी से मुंगेर में भविष्य संवार रहीं कृतिका, जल संरक्षण की मुहिम से जगा रहीं नई उम्मीद

Published: Thu, 15 Oct 2026 06:59 AM (IST)

बिहार वानिकी महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक कृतिका सुमन मुंगेर में जल संरक्षण की अलख जगा रही हैं। वे वर्षाजल संचयन ...और पढ़ें

वानिकी महाविद्यालय सह शोध संस्थान मुंगेर की सहायक प्राध्यापक सह कनीय विज्ञानी कृतिका सुमन।

वानिकी महाविद्यालय सह शोध संस्थान मुंगेर की सहायक प्राध्यापक सह कनीय विज्ञानी कृतिका सुमन।

HighLights

  1. कृतिका सुमन मुंगेर में जल संरक्षण की अलख जगा रहीं।

  2. वर्षाजल संचयन और नदियों की स्वच्छता पर दे रहीं जोर।

  3. भविष्य की पीढ़ियों के लिए पानी बचाने का संदेश।

संवाद सूत्र, मुंगेर। पानी की हर बूंद में भविष्य बसता है। आज इसे सहेज लिया तो कल की प्यास बुझाने का इंतजाम होगा, वरना आने वाली पीढ़ियों को बूंद-बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।

इसी सोच के साथ बिहार वानिकी महाविद्यालय सह शोध संस्थान, मुंगेर की सहायक प्राध्यापक सह कनीय विज्ञानी कृतिका सुमन जल संरक्षण की अलख जगा रही हैं।

उनका प्रयास केवल पानी का महत्व समझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की आदतों में बदलाव लाकर जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाना है। गांवों तक पहुंचकर वह वर्षाजल संचयन के उपाय बताती हैं और लोगों को जलस्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित करती हैं।

बूंदों को सहेजने से शुरू होगी बदलाव 

कृतिका सुमन का मानना है कि वर्षा का पानी बहकर बर्बाद हो जाए, यह प्रकृति के अनमोल उपहार की अनदेखी है। घरों और गांवों में वर्षाजल संचयन की व्यवस्था अपनाकर पानी को सहेजा जा सकता है। इससे भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

वह ग्रामीणों को पानी के विवेकपूर्ण उपयोग और वर्षाजल संचयन की जरूरत समझाती हैं, ताकि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि हर परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बने।

नदियों की सेहत में छिपा जीवन का आधार

जल संरक्षण की उनकी सोच नदियों की स्वच्छता और जलीय जीवों के अस्तित्व से भी जुड़ी है। गंगा सहित दूसरी नदियां केवल मनुष्य की जरूरतें पूरी नहीं करतीं, बल्कि पशु-पक्षियों और जलीय जीवों के जीवन का भी आधार हैं।

गंगा में पाई जाने वाली डाल्फिन जैसे जीवों का अस्तित्व स्वच्छ जल पर निर्भर है। नदियों में बढ़ता प्रदूषण और जलस्रोतों के प्रति लापरवाही जलीय पारिस्थितिकी के लिए गंभीर चुनौती है। कृतिका मानती हैं कि नदियों को स्वच्छ रखने और जलीय जीवों को बचाने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ आम लोगों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।

हर घर से उठे संरक्षण की आवाज

कृतिका सुमन का संदेश स्पष्ट है कि जल संरक्षण के लिए किसी बड़े अभियान का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। इसकी शुरुआत घर, परिसर और आसपास के जलस्रोतों से हो सकती है।

वर्षाजल को सहेजना, पानी की बर्बादी रोकना और नदियों को प्रदूषण से बचाना ऐसे कदम हैं, जिनमें हर व्यक्ति योगदान दे सकता है। उनका प्रयास लोगों को यह समझाना है कि जल संरक्षण आज की जरूरत भर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। जब समाज पानी की कीमत समझेगा, तभी जल सुरक्षा की मजबूत नींव तैयार होगी।

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