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    चापानल पर दबंगों का कब्जा, कैसे बुझेगी लोगों की प्यास

    By JagranEdited By:
    Updated: Wed, 06 Jun 2018 06:18 PM (IST)

    लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने में पीएचईडी विभाग और नगर निगम पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है। वहीं चापानल व समरसेबल पर दबंगों का कब्जा होने से आम लोग परेशान हैं।

    चापानल पर दबंगों का कब्जा, कैसे बुझेगी लोगों की प्यास

    मुंगेर। लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने में पीएचईडी विभाग और नगर निगम पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है। वहीं चापानल व समरसेबल पर दबंगों का कब्जा होने से आम लोग परेशान हैं। निगम क्षेत्र के वासुदेवपुर ओपी, पूरबसराय, बेकापुर, शादीपुर सहित कई जगहों पर विधायक, संसद कोटे से लगे बड़े हथिया चापाकल में मोटर और पाइप लगाकर लोगों ने अपने घर में पानी का कनेक्शन कर लिया। शहर के दर्जनों इलाकों में रसूखदारों ने अपने दरवाजे पर निजी लाभ के लिए शुरुआत में हथिया चापानल लगा दिया। लेकिन कुछ दिनों बाद सरकारी चापानल का ऊपरी हिस्सा हटाकर उसमें मोटर लगा निजी कब्जे में ले लिया। लोग भय से इसकी शिकायत भी नहीं कर पाते हैं। ऐसे जिले में सैकड़ों मामले हैं, जहां सरकारी नल को लोगों ने दबंगता से निजी नल बना लिया है। इसके कारण गरीब जनता पानी के लिए दर-बदर भटक रही है।

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    पानी पर दबंगों के कब्जे का कैसे होता है खेल

    दरअसल जनप्रतिनिधि, सांसद, मंत्री, विधायक, एमएलसी की अनुशंसा पर चापानल या प्याऊ उनके फंड से गरीब जनता की प्यास बुझाने के लिए लगाई जाती है। लेकिन, पार्टी कार्यकर्ता की पसंद से उनके चहेते के अनुसार प्याऊ और चापानल को लगा दिया जाता है। जिसपर धीरे-धीरे रसूखदारों का कब्जा हो जाता है।

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    आंकड़ों पर एक नजर

    सदर प्रखंड के 13 पंचायतों में पीएचईडी, बीआरजीएफ, विधायक एवं सांसद के निधि को मिलाकर छह करोड़ रुपये 10 वर्षों के दौरान लोगों की प्यास बुझाने के लिए अब तक खर्च किए गए हैं। लेकिन, नतीजा सिफर रहा। आंकड़े के मुताबिक सदर प्रखंड क्षेत्र में कुल 5000 चापानल है। जिसमें सौ से अधिक चापानलों पर दबंगों का कब्जा है। आधे से अधिक चापानल खराब पड़े हैं। लोगों की प्यास बुझाने के लिए पैसे तो खर्च किए गए लेकिन प्यास नहीं बुझ पाई।

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    कहते हैं लोग

    गंगा मंडल, कारे पासवान, विक्की शर्मा, सीता देवी, संध्या देवी, अरुण पासवान आदि का कहना है कि करोड़ों खर्च के बाद उन्हें शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है। चापानल लगने के कुछ ही महीने बाद खराब हो गए। ठेकेदारों द्वारा विभागीय प्राक्कलन के अनुसार काम नहीं किया गया है।

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    कहते हैं पंचायत प्रतिनिधि

    प्रखंड के 13 पंचायतों की देखभाल के लिए कुल आठ कर्मचारी पीएचईडी विभाग के हैं। जबकि प्रत्येक पंचायत में एक मिस्त्री एवं खलासी होना चाहिए। नौवागढी दक्षिणी, तारापुर दियारा सहित अन्य पंचायतों में चापानल से ऑरसेनिक युक्त जल निकल रहा है। इसके अलावा अधिकांश चापानल से लोग निजी लाभ अíजत कर रहे हैं। तारापुर पंचायत की मुखिया बेबी देवी ने बताया कि सूचना के बाद भी पीएचईडी विभाग खराब चापानल को ठीक कराने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है। नौवागढी दक्षिणी पंचायत समिति सदस्य प्रीति कुमारी ने कहा कि नौवागढ़ी दक्षिणी पंचायत सहित इसके आसपास के इलाके में पीएचईडी विभाग के सैकड़ों चापानल खराब पड़े हुए हैं। शिकायत के बाद भी नहीं ले रहा है कोई सुध।

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    बोले कार्यपालक अभियंता

    इस संबंध में पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता अजित कुमार ने कहा कि हमें ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है। अगर सरकारी चापानल पर निजी मोटर लगाकर लोग इसे अपने घर में उपयोग कर रहे हैं तो यह कानून का उल्लंघन है। उस पर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने का प्रावधान है। हमें इस संबंध में सूचना मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।

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    बोले विधायक

    विजय कुमार विजय ने कहा कि लोगों के अनुरोध पर उसके द्वारा चयनित स्थल पर चापानल या प्याऊ की स्वीकृति की अनुशंसा कर दी है। लेकिन, उस पर किसी दबंगों का कब्जा है तो संबंधित विभाग को इस दिशा में कार्रवाई करनी चाहिए थी। ऐसे मुझे जानकारी मिली है कि कुछ लोग जीपीटी चापाकल एवं प्याऊ पर अवैध कब्जा किए हुए हैं। जिला प्रशासन से अविलंब इस मामले में कार्रवाई की मांग करूंगा।