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मुंगेर के धरहरा सीएचसी में डॉक्टरों के लिए आवास नहीं, परिसर में बीएचएम का डेरा, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

Published: Fri, 06 Nov 2026 08:27 AM (IST)

मुंगेर के धरहरा सीएचसी में डॉक्टरों के लिए आवासीय सुविधाओं का गंभीर अभाव है, जबकि अस्पताल प्रबंधक परिसर में ही रह रहे हैं, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों में असंतोष बढ़ रहा है।

धरहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) परिसर और डॉक्टरों का अधूरा पड़ा आवासीय भवन. जागरण

धरहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) परिसर और डॉक्टरों का अधूरा पड़ा आवासीय भवन. जागरण

HighLights

  1. धरहरा सीएचसी में डॉक्टरों के लिए आवासीय सुविधा की कमी।

  2. अस्पताल प्रबंधक परिसर में रह रहे, डॉक्टरों में असंतोष।

  3. ठेकेदार डिबार होने से नया आवासीय भवन अधूरा पड़ा।

संवाद सहयोगी, धरहरा (मुंगेर)। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) धरहरा में स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों के लिए आवासीय सुविधाओं की भारी कमी को लेकर प्रशासनिक व विभागीय सवाल खड़े होने लगे हैं।

स्थिति यह है कि अस्पताल में चौबीसों घंटे तैनात रहने वाले चिकित्सकों के लिए अब तक समुचित आवासन की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है, जबकि अस्पताल प्रबंधक (बीएचएम) सत्येंद्र कुमार सीएचसी परिसर में ही बने एक क्वार्टर में रह रहे हैं। इस दोहरी व्यवस्था को लेकर सीएचसी के स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों के बीच अंदरुनी असंतोष बढ़ने लगा है।

संवेदक डिबार, अधर में लटका चिकित्सकों का नया भवन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की ओर से धरहरा सीएचसी परिसर में चिकित्सकों के लिए नए आवासीय भवन का निर्माण कराया जा रहा था। हालांकि, निर्माण कार्य में बरती गई भारी लापरवाही और धीमी गति के चलते संबंधित संवेदक (ठेकेदार) को विभाग द्वारा डिबार (Debar) घोषित कर दिया गया।

Dharhara CHC Doctor Housing Crisis in Munger Bihar (1)

धरहरा सीएचसी परिसर के इस भवन में हैं बीएचएम का आवास,।

संवेदक पर कार्रवाई होने के बाद से नए आवासीय भवन का काम पूरी तरह ठप और अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे डॉक्टरों को परिसर में रहने की जगह नहीं मिल पा रही है। इस बीच, सीएचसी परिसर में स्थित एक पुराने क्वार्टर में बीएचएम सत्येंद्र कुमार का आवासन है, जिस पर अन्य कर्मियों ने सवाल उठाए हैं।

नियमों पर उठे सवाल, आपातकालीन सेवाओं पर पड़ सकता है असर

सीएचसी में कार्यरत एक चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सामान्य नियमानुसार सीएचसी परिसर में 24 घंटे किसी न किसी चिकित्सक की मौजूदगी अनिवार्य होती है। ऐसी स्थिति में प्राथमिक प्राथमिकता डॉक्टरों के आवासन की होनी चाहिए, क्योंकि डॉक्टरों के लिए आवास न होने से रात्रि कालीन और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन पर असर पड़ता है।

चिकित्सकों का तर्क है कि अस्पताल प्रबंधक के लिए सीएचसी परिसर के भीतर इस तरह के आवासन का प्रावधान प्राथमिकता में नहीं आता, खासकर तब जब मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों के पास ही रहने का साधन न हो।

विभागीय आदेश पर स्पष्टता का इंतजार

पूरे विवाद पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अविनाश कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अस्पताल प्रबंधक (बीएचएम) सत्येंद्र कुमार के सीएचसी परिसर में रहने को लेकर विभागीय आदेश जारी किया गया है। उन्हें विभाग से आवासन की विधिवत अनुमति प्राप्त है।

हालांकि, डॉ. अविनाश ने यह भी स्वीकार किया कि विभागीय आदेश में किन विशिष्ट शर्तों और प्रावधानों के तहत यह अनुमति दी गई है, इस संबंध में पूरी स्पष्टता आना अभी बाकी है।

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