बिहार के मधुबनी का सतघरा बना स्मार्ट गांव, विदेश में रह रहे लोग कर रहे विकास; जानें क्या-क्या हैं सुविधाएं
मधुबनी जिले के सतघरा गांव को अमेरिका में रहने वाले दो लोगों और सूरत में काम करने वाले उनके मित्र की मदद से स्मार्ट सिटी जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। यहां अच्छी सड़कें बिजली सोलर लाइट स्मार्ट स्कूल एंबुलेंस वाई-फाई सेंटर और सीसीटीवी कैमरे जैसी सुविधाएं हैं। बुजुर्गों के लिए मुफ्त रसोईघर चलता है।
मदन कुमार कर्ण, बाबूबरही (मधुबनी)। अमेरिका में रहने वाले दो लोगों की पहल और सूरत में काम करने वाले उनके मित्र के सहयोग से शुरू हुए विकास के काम से बिहार के मधुबनी जिले का सतघरा गांव अलग पहचान बना चुका है।
गांव में स्मार्ट सिटी की तरह सुविधा साकार रूप ले रही है। अच्छी सड़क, बिजली के साथ सोलर लाइट से जगमगातीं गलियां, स्मार्ट स्कूल, एंबुलेंस, बुजुर्गों के लिए निशुल्क रसोईघर, वाई-फाई सेंटर, क्लोज सर्किट (सीसी) कैमरा, सुसज्जित तालाब और यज्ञशाला।
क्या नहीं है इस गांव को विशिष्ट पहचान देने के लिए। यहां के लोग भले तन से विदेश या अन्य शहरों में हैं, लेकिन मन से गांव का विकास कर रहे।
अमेरिका में रहकर गूगल में काम करने वाले सतघरा के सुनील कुमार झा और वहीं, एक कंपनी में सीईओ संजय कुमार झा जब भी गांव आते थे तो यहां का पिछड़ापन देख उन्हें काफी दुख होता था।
दोनों ने सूरत में रहने वाले अपने मित्र इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर अरविंद चौधरी से इस संबंध में चर्चा की तो विकास के लिए दो वर्ष पहले सतघरा विकास फाउंडेशन (एसडीएफ) की नींव पड़ी। धीरे-धीरे दुबई, इंग्लैंड, बहरीन, कतर में रहने वाले गांव के करीब एक दर्जन अन्य लोग भी जुड़ गए।
बुजुर्गों के लिए रसोईघर के संचालन से शुरुआत
एसडीएफ के संस्थापक सदस्य अरविंद चौधरी बताते हैं कि दो साल में यह बदलाव आया है। रोजी-रोटी और अच्छे भविष्य के लिए यहां के बहुत से लोग बाहर चले गए।
परिवार के वृद्ध गांव में ही रह गए या उन्होंने बाहर जाना पसंद नहीं किया, गांव में भोजन की उपलब्धता बाधा बनती थी। फाउंडेशन की तरफ से सबसे पहले सामूहिक भंसाघर (रसोईघर) चलाने का निर्णय लिया गया।
शुरुआती दौर में जरूरतमंद 10-12 लोगों को उनके घर तक भोजन पहुंचाया जाता था। आज औसतन 35 से 40 लोगों को अल्प दर पर भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। असहाय, निराश्रित और 70 से अधिक उम्र के लोगों को मुफ्त भोजन दिया जा रहा है। इस मद में प्रतिमाह 35 से 40 हजार रुपये खर्च आता है।
गांव में वाई-फाई सेंटर, इंट्री प्वाइंट पर सीसी कैमरे
सतघरा में वाई-फाई सेंटर है। विदेश या बाहर से आने वाले वर्क फ्रॉम होम या ऑनलाइन मीटिंग की स्थिति में यहीं से काम करते हैं। एसडीएफ की बैठक में विदेश में रहने वाले लोग जुड़ते हैं। यहां इनवर्टर और प्रोजेक्टर भी लगा है। गांव की सुरक्षा के लिए 72 हजार रुपये की लागत से अब तक 16 सीसी कैमरे लगाए जा चुके हैं।
दशहरा तक 25 और लगाने की योजना है। एसडीएफ की ओर से गांव में 50 से अधिक सोलर लाइट लगाई गई हैं। एसडीएफ के अध्यक्ष प्रजापति ठाकुर तथा सक्रिय भूमिका निभाने वाले मदन मिश्रा बताते हैं कि अनियमित बिजली आपूर्ति को देखते हुए सोलर लाइट की व्यवस्था की गई है।
गांव में अपनी एंबुलेंस सेवा
आपातकालीन स्थिति के लिए गांव में एंबुलेंस की व्यवस्था है। यह सतघरा के अलावा पांच किलोमीटर परिधि के गांवों के लोगों को महज तेल खर्च पर उपलब्ध होती है। गांव में प्रत्येक रविवार को निशुल्क चिकित्सा शिविर लगाया जाता है।
हाल ही में नेत्र जांच शिविर लगाया गया था, जिसमें 250 लोगों को निशुल्क चश्मे दिए गए। एसडीएफ ने छह लाख रुपये की लागत से दुर्गा पोखर में घाट तथा यज्ञशाला का निर्माण कराया है। गांव में एक प्लस टू तथा दो प्राथमिक विद्यालय हैं।
इसमें पढ़ने वाले कमजोर तथा जरूरतमंद बच्चों के लिए अलग से निशुल्क स्मार्ट क्लास की व्यवस्था की गई है। वहां प्रोजेक्टर, कंप्यूटर, इनवर्टर आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनमें गांव के ही पांच युवा कार्यरत हैं। इनके वेतन मद में प्रतिमाह 25 हजार खर्च आता है।
डेयरी और कृषि के क्षेत्र में काम करने की योजना
एसडीएफ पंचायत के अन्य मोहल्ले के लोगों को भी इससे जोड़ेगा। स्थानीय लोगों के विकास के लिए डेयरी तथा कृषि क्षेत्र में काम करने की योजना है, ताकि ग्रामीणों की आर्थिकी स्थानीय स्तर पर बढ़ाई जा सके।
अरविंद बताते हैं कि अब तो देश के विभिन्न शहरों में रहकर काम करने वाले लोग भी फाउंडेशन से जुड़ गए हैं। सदस्यों की संख्या करीब 400 हो गई है। सालाना करीब 15 लाख फंड जमा होता है। उससे काम हो रहा है।
मुखिया नंदकुमार यादव बताते हैं कि एसडीएफ के प्रयास से गांव की तस्वीर बदल रही है। गांव की तरक्की के लिए इनकी तरफ से उठाया जा रहा कदम सराहनीय है।
ग्रामीण जागरूक होंगे तो गांव और तरक्की करेगा। सतघरा में ऐसा ही हो रहा है। सामाजिक भागीदारी से अच्छा काम हो रहा है। प्रशासन की तरफ से एसडीएफ को जहां जरूरत होगी, वहां हम तैयार हैं। -राधारमण मुरारी, बीडीओ, बाबूबरही, मधुबनी
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