मधुबनी । पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए जिले के तीन प्रमुख स्थलों को पर्यटन स्थल की मान्यता दिलाने के लिए करीब एक वर्ष पूर्व विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी। इन स्थलों में जिले के राजा बलिराजगढ़, उग्रनाथ महादेव मंदिर एवं उच्चैठ दुर्गा स्थान शामिल हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए एक योजना बनाई गई थी। जिसके तहत जिले के प्रमुख होटलों एवं प्रमुख टैक्सी ऑपरेटरों के बारे में एक क्लिक पर जानकारी उपलब्ध कराना शामिल था। बता दें कि जिले में पर्यटन को बढ़ावा से रोजगार का सृजन होगा और क्षेत्र का भी विकास होगा।

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पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करने की योजना पर शुरू किया गया था कार्य :

पर्यटन विभाग द्वारा वेबसाइट के माध्यम से पर्यटकों का ध्यान पर्यटन स्थलों की ओर खींचकर उन्हें पर्यटन के लिए आकर्षित करने की योजना पर काम शुरू किया गया था। इस वेबसाइट पर मधुबनी के तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों में बाबूबरही प्रखंड के राजा बलिराजगढ़, पंडौल प्रखंड के उग्रनाथ महादेव मंदिर तथा बेनीपट्टी प्रखंड के उच्चैठ दुर्गा स्थान से संबंधित उच्च कोटि का फोटोग्राफ दर्शाए जाने की योजना को शामिल किया गया था। पर्यटन विभाग द्वारा जिले के उक्त तीनों प्रमुख पर्यटकीय स्थलों के अलावा अन्य पर्यटकीय स्थल को वेबसाइट पर दर्शाने के लिए जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया था।

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फुलहर व कल्याणेश्वर स्थान होंगे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित :

भारत-नेपाल सीमावर्ती हरलाखी प्रखंड क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक धरोहर कल्याणेश्वर स्थान महादेव मंदिर कलना एवं गिरजा स्थान फुलहर को सरकार द्वारा वर्ष 2020 में पर्यटन स्थल क्षेत्र घोषित किया गया। इसको लेकर पर्यटन मंत्रालय के दो सदस्यीय टीम इन दोनों स्थानों का निरीक्षण भी किया था। टीम ने गिरजा स्थान मंदिर परिसर का मुआयना कर दोनों पोखरा का भी निरीक्षण किया एवं यहां दोनों पोखरा की उड़ाही, मंदिर परिसर का चारदीवारी, निर्माण एवं टूरिस्ट प्लेस के रूप में विकसित किए जाने पर बल दिया था। टीम ने कल्याणेश्वर स्थान महादेव मंदिर कलना का निरीक्षण कर विकास करने की घोषणा की गई थी।

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राजा बलि के गढ़ के नाम से जाना जाता बलिराजगढ़ :

जिले के बाबूबरही प्रखंड के बलिराजगढ़ में प्राचीन किला तथा गढ़ स्थानीय स्तर पर राजा बलि का गढ़ के नाम से जाना जाता है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का केन्द्रीय रूप में संरक्षित स्थल है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने पहली बार वर्ष 1962-63 में खुदाई किया था। जिसके बाद राज्य पुरातत्व, बिहार सरकार ने 1972-73 में खुदाई की। इसके आगे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने वर्ष 2013-14 में खुदाई का कार्य किया। खुदाई में पांच चरणों के सांस्कृतिक कालों यथा-उत्तरी काले मृदमाण्ड, शुंग, कुषाण, गुप्त व इसके बाद पालों के काल, के प्रमाण का पता चला है। खोज में तीन विभिन्न चरणों में परकोटा के अवशेष, जली हुई ईंटों के संरचना के अवशेष और आवासीय भवनों की कुछ अन्य संरचनाएं भी प्रकाश में आई है। पुरावशेषों में टेराकोटा की वस्तुएं जैसे जानवर और मनुष्य की मूर्तियां, बीड, अ‌र्द्ध मूल्यवान पत्थरों की बीड, गोलबंद आदि शामिल हैं। 17 जनवरी 2012 को सेवा यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यहां पहुंचे थे। इस दौरान सीएम ने पुरातात्विक महत्व वाले बलिराजगढ़ की खुदाई का आश्वासन दिया था।

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मुसहरनिया डीह में बौद्ध महाविहार होने के साक्ष्य मौजूद :

मधुबनी जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी की दूरी पर अवस्थित मुसहरनिया डीह में बौद्ध महाविहार होने के साक्ष्य मौजूद हैं। यहां दो बड़े और चार छोटे टीलों का अस्तित्व बचा है। मुसहरनिया डीह में दो वर्ष पहले तक निर्माण कार्य स्थलों, खेतों में भगवान बुद्ध सहित अन्य मूर्तियां और मिट्टी के बर्तन आदि मिलते रहे हैं। इस प्राचीन टीलों के उत्खनन से गर्भ में छिपे इतिहास सामने आ सकता है। इस जगह मठ, कुआं, तालाब के चिह्न देखे जा सकते है। कुछ विद्वानों ने इस टीले को कर्नाट वंशीय राजा हरि सिंह देव के राज महल का भग्नावशेष मान रहे हैं।

Edited By: Jagran