मधुबनी। मिथिला की प्रसिद्ध पावन परिक्रमा डोली बुधवार को गिरजा स्थान फुलहर से चलकर तीसरे पड़ाव स्थल नेपाल के मटिहानी पहुंची। लक्ष्मीनारायण मठ के मान महंत जगन्नाथदास वैष्णव के नेतृत्व में मेयर हरी प्रसाद मंडल एवं सीमावर्ती क्षेत्र के हजारों नर-नारियों ने मिथिला बिहारी एवं जानकी जी की डोली एवं साथ चल रहे साधु, संत एवं महंतों का पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया। सीमावर्ती क्षेत्र के हजारों लोगें ने भगवान की डोली की पूजा-अर्चना की। इस क्रम में साधु संतों के जयघोष व भजन-कीर्तन से माहौल आध्यात्मिक हो गया। भगवान की डोली के पहुंचते ही लोगों की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। वहीं परिक्रमा में भाग लेने वाले साधु, संत, महंत व अन्य श्रद्धालु का सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों ने मिथिला परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया। रास्ते में सड़क किनारे खड़े हजारों लोगों ने भगवान की डोलियों पर पुष्प वर्षा की। परिक्रमा में दोनों देशों के हजारों संत महात्मा, गृहस्थों के अतिरिक्त भारतीय क्षेत्र के अयोध्या, काशी, मथुरा, वृंदावन आदि के लाखों श्रद्धालु 15 दिनों तक भक्ति के साथ पांव पैदल भाग लेते हैं। 15 दिनों में 15 स्थलों की परिक्रमा करती है यह यात्रा

प्रतिवर्ष फाल्गुन प्रतिपदा से कल्याणेश्वर स्थान से शुरू होकर फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को जनकपुरधाम में समाप्त होने वाली मिथिला परिक्रमा भारत-नेपाल के सांस्कृतिक एकता का उदाहरण है। 15 दिवसीय परिक्रमा फाल्गुन अमावस्या पर नेपाल के कचुरी धाम से हजारों संत महात्माओं व अन्य श्रद्धालुओं के साथ मिथिला बिहारी व जानकी जी की डोली उठती है। यह हनुमानगढ़ी होते हुए भारत के कल्याणेश्वर धाम पहुंचती है। अगले दिन गिरजा स्थान फुलहर और तीसरे दिन मटिहानी पहुंचती है। परिक्रमा मिथिला क्षेत्र से जुड़े भारत-नेपाल के प्रसिद्ध 15 देवस्थलों का भ्रमण पैदल 15 दिनों तक होता हैं। प्रत्येक विश्राम स्थलों पर भगवान के डोली की ठहरने की व्यवस्था अलग-अलग रहती है। लोग रात्रि विश्राम करते हैं। रात्रि के समय विश्राम स्थलों में भजन कीर्तन के साथ-साथ रामलीला एवं झांकी आदि का आयोजन किया जाता है। करीब 84 कोस (250 किलोमीटर) पैदल भ्रमण करने के बाद अंतिम दिन पूर्णिमा को परिक्रमा जनकपुरधाम में पंचकोशी परिक्रमा कर एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगा व उड़ाकर परिक्रमा समाप्त हो जाती है। मिथिला परंपरा से आवभगत

साधु, संत, महात्मा एवं श्रद्धालुओं की आवभगत मिथिला की परंपरा के अनुसार किया गया। दोनों देश के संघ संस्थाओं के द्वारा शिविर लगाए गए। मेला के दौरान यात्रियों के सहयोग और सेवा के लिए दोनों देशों के संघ संस्थाओं के द्वारा मेला में बीमार लोगों की सेवा के लिए जगह-जगह शिविर लगाकर दवा वितरण किया गया।

मटिहानी के व्यवसायियों की ओर से परिक्रमा पैदल यात्रा में शामिल लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। मेला में शांति व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में नेपाल प्रहरी और एपीएफ के जवान व भारतीय क्षेत्र से एसएसबी व मधवापुर थाना पुलिस के जवान तैनात किए गए थे। सीमावर्ती क्षेत्र के गण्यमान्य व विभिन्न दलों के कार्यकर्ता व आम नागरिक तत्पर दिखे। परिक्रमा डोली गुरुवार सुबह अगले पड़ाव स्थल जलेश्वर के लिए सियाराम का जयघोष लगाते हुए प्रस्थान करेगी। परिक्रमा में पहुंचे साधु, संतों, महंत एवं गृहस्थ लोगों की सेवा में मटिहानी लक्ष्मी नारायण मठ के मान महंत जगन्नाथ दास वैष्णव, मटिहानी के मेयर हरी प्रसाद मंडल एवं व्यवसायी राजेश गुप्ता सहित सीमावर्ती दोनों देशों के आमजन जुटे हुए थे।

Posted By: Jagran

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