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    Madhubani News: मधुबनी के 17 प्रखंडों में होगी इन रोगियों की खोज, 15 जून तक चलेगा अभियान

    Updated: Tue, 03 Jun 2025 02:38 PM (IST)

    मधुबनी जिले के 17 प्रखंडों में कालाजार रोगियों की खोज के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। 8 से 15 जून तक चलने वाले इस अभियान में 37 गांवों के 38 हजार लोगों की जांच की जाएगी। प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। कालाजार रोगियों को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।

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    जिले के 17 प्रखंडों में होगी कालाजार रोगी की खोज

    जागरण संवाददाता, मधुबनी। जिले में कालाजार मरीजों की खोज के लिए अभियान चलाया जाएगा। आठ से 15 जून तक चलने वाला अभियान जिले के 17 प्रखंडों के 37 गांव में चलेगा। चिन्हित 17 प्रखंडों में कुल 38 हजार लोगों की जांच की जाएगी। जिसके लिए 9500 घरों को चिन्हित किया गया है।

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    अभियान में 37 आशा एवं 38 आशा फैसिलिटर, ब्लाक स्तर के सुपरवाइजर और जिला स्तर के मानिटर शामिल होंगे। आशा कार्यकर्ता वर्ष 2022 से अप्रैल 2025 तक रिपोर्ट के आधार पर उनके घरों के चारों ओर 200 से 250 घरों में संभावित मरीजों की पहचान करेगी।

    मरीजों की खोज कालाजार प्रभावित प्रखंडों में पूर्व में प्रतिवेदित मरीजों के घर के 500 मीटर के परिधि में होगी। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डीएस सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा हाउस टू हाउस जाकर कालाजार, पीकेडीएल और एचआईवी वीएल की जांच के लिए माइक्रो प्लान तैयार किया गया है। अभियान की सफलता को लेकर प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

    हरेक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कालाजार जांच की सुविधा उपलब्ध

    हरेक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कालाजार जांच की सुविधा उपलब्ध है। कालाजार की किट (आरके-39) से 10 से 15 मिनट के अंदर टेस्ट हो जाता है। हर सेंटर पर कालाजार के इलाज में विशेष रूप से प्रशिक्षित एमबीबीएस चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध हैं।

    डॉ. सिंह ने बताया कालाजार से पीड़ित रोगी को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में राशि दिए जाते हैं।

    बीमार व्यक्ति को 6600 रुपये राज्य सरकार की ओर से और 500 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यह राशि वीएल (ब्लड रिलेटेड) कालाजार में रोगी को प्रदान की जाती है।

    वहीं, चमड़ी से जुड़े कालाजार (पीकेडीएल) में 4000 रुपये केंद्र सरकार की ओर से दी जाती है। भीडीसीओ पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि कालाजार मादा फाइबोटोमस अर्जेंटिपस(बालू मक्खी) के काटने के कारण होता है, जो कि लीशमैनिया परजीवी का वेक्टर (या ट्रांसमीटर) है।

    किसी जानवर या मनुष्य को काटकर हटने के बाद भी अगर वह उस जानवर या मानव के खून से युक्त है तो अगला व्यक्ति जिसे वह काटेगा वह संक्रमित हो जायेगा।

    इस प्रारंभिक संक्रमण के बाद के महीनों में यह बीमारी और अधिक गंभीर रूप ले सकती है, जिसे आंत में लिशमानियासिस या कालाजार कहा जाता है।