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    Sawan 2025: किस दिन होगा सावन का समापन, कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन? यहां जानिए सही तारीख

    Updated: Thu, 10 Jul 2025 04:53 PM (IST)

    सावन माह का आरंभ 11 जुलाई से हो रहा है जिसका हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से शुभ फल मिलते हैं। सावन में सोमवारी व्रत का भी महत्व है। गुरु पूर्णिमा पर गुरुओं का पूजन किया गया क्योंकि गुरु अज्ञान को दूर करते हैं और ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं।

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    किस दिन होगा सावन का समापन, कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन?

    संवाद सूत्र, पुरैनी (मधेपुरा)। इस वर्ष सावन माह की शुरुआत शुक्रवार (Sawan 2025 Start Date) से शुरू हो रही है। हिंदू धर्म में सावन माह का विशेष महत्व है। सावन माह में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस महीने को भगवान शिव का सबसे प्रिय माह कहा जाता है।

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    सावन के महीने में की गई पूजा-अर्चना, अभिषेक आदि से भगवान शिव निश्चित रूप से प्रसन्न होते हैं।मालूम हो कि इस बार सावन माह 11 जुलाई शुक्रवार से शुरू होकर 09 अगस्त शनिवार को सम्पन्न होगा। 09 अगस्त को सावन पूर्णिमा के मौके पर रक्षाबंधन पर्व भी मनाया जाएगा।

    सनातन धर्म में सावन को सबसे पुण्यदायी महीना माना गया है। इस माह में भगवान शिव धरती पर मौजूद रहते हैं। इस बार सावन का पहला सोमवारी व्रत 14 जुलाई, दूसरा 21 जुलाई, तीसरा 28 जुलाई और चौथा सोमवारी 04 अगस्त को होगा। पूर्णिमा तिथि 08 अगस्त दोपहर 2:12 बजे से प्रारंभ होगी, जो 09 अगस्त दोपहर 1:24 बजे समाप्त होगी।

    गणेशपुर निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित दिनकर झा ने बताया कि सावन में सोमवारी का व्रत करने से विवाहित स्त्रियों को जहां सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं, कुवारी कन्याओं के व्रत करने से मनचाहा वर की प्राप्ति होती है।

    उन्होंने बताया कि सावन महीना में प्रतिदिन शिव की उपासना का विधान है। इसमें प्रत्येक सोमवार एवं प्रदोष में शिव पूजन अवश्य करना चाहिए। इसमें नियम, संयम, भक्ति भाव, शुद्ध आचरण, शुद्ध आहार व शुद्ध विचार रखने से भक्तों पर भोलेनाथ की असीम कृपा बरसती है।

    सावन में शिवलिंग का रुद्राभिषेक शिवजी की पार्थिव पूजन, लघु रूद्र, महा रूद्र का पाठ, शिवालयों में जलाभिषेक व बेलपत्र अर्पित करना आदि काफी श्रेष्ठ माना गया है। इसमें दैहिक, दैविक, भौतिक एवं अध्यात्मिक तपों का शमन होता है।

    गुरुवार को मनाई गई गुरु पूर्णिमा:

    गुरु पूर्णिमा का महत्व भारतीय सनातन धर्म में प्राचीन काल से चली आ रही है। पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास की जयंती गुरु पूर्णिमा के दिन ही मनाई जाती है। उनके जन्मदिन के कारण ही आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा तिथि गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।

    गुरुवार को गुरु पूर्णिमा के मौके पर श्रद्धालुओं सहित अनुयायियों द्वारा श्रद्धापूर्वक गुरु व्यास का पूजन सहित गुरु वंदना की गई। साथ ही इस मौके पर आदि गुरु शंकराचार्य का भी भक्ति भावना के साथ स्मरण की गई।

    मकदमपुर निवासी पंडित पवन झा ने बताया कि अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान रूपी प्रकाश से जो नेत्र को खोले वही गुरु है। ऐसे गुरुजनों का गुरु पूर्णिमा के दिन पूजन वंदन अवश्य करनी चाहिए। इस दिन गुरुओं को ज्ञान का स्रोत माना जाता है। गुरु से ज्ञान प्राप्त करना मोक्ष का मार्ग माना गया है। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए काफी शुभ होता है।