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लखीसराय में 102 एंबुलेंस की खुली पोल, 9 गाड़ियों में एक्सपायरी दवाएं मिलीं, 21 वाहनों की जांच में तकनीकी खामियां

Published: Mon, 19 Oct 2026 10:16 AM (IST)

लखीसराय में 102 एंबुलेंस सेवा की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है, जहां नौ गाड़ियों में एक्सपायरी दवाएं और अधिकांश में तकनीकी खामियां पाई गईं।

लखीसराय में 102 एंबुलेंस।

लखीसराय में 102 एंबुलेंस।

HighLights

  1. नौ एंबुलेंस में मिलीं समय सीमा समाप्त दवाएं।

  2. अधिकांश वाहनों में पाई गईं गंभीर तकनीकी खामियां।

  3. सेवा प्रदाता एजेंसी 'जेन प्लस' को सुधार के निर्देश।

संवाद सहयोगी, लखीसराय। सांसें थमने से पहले अस्पताल पहुँचने की जद्दोजहद हो या फिर सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को समय पर उपचार दिलाने की चुनौती—ऐसे नाजुक वक्त में 102 एंबुलेंस मरीज और उसके परिजनों के लिए जीवन की सबसे बड़ी उम्मीद होती है।

लेकिन लखीसराय जिले में इसी आपातकालीन एंबुलेंस सेवा की विशेष जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। जिले में संचालित नौ एंबुलेंस में उपयोग की समय सीमा समाप्त (एक्सपायर) हो चुकी दवाएं पाई गई हैं, वहीं अधिकांश जांची गई गाड़ियों में गंभीर तकनीकी खामियां भी सामने आई हैं।

इस खुलासे के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और जीवन रक्षक निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिलाधिकारी के सख्त आदेश पर जिले के विभिन्न अस्पतालों में संचालित एंबुलेंस और शव वाहनों का फिटनेस और उपलब्धता संबंधी जांच अभियान चलाया जा रहा है।

जिले में कुल 25 एंबुलेंस और दो शव वाहन संचालित हैं। इनमें से अब तक मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआई) द्वारा 21 एंबुलेंस और एक शव वाहन की जांच पूरी की जा चुकी है।

30 सितंबर 2026 को ही समाप्त हो चुकी थी दवाओं की मियाद

एमवीआई की तकनीकी जांच में जहां एक तरफ अधिकांश एंबुलेंस की गाड़ियों में तकनीकी और यांत्रिक कमियां पाई गईं, वहीं सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि नौ एंबुलेंस में ऐसी दवाएं पाई गईं जिनकी मियाद 30 सितंबर 2026 को ही खत्म हो चुकी थी।

नियमों के अनुसार 102 एंबुलेंस में 31 प्रकार की दवाएं, 33 तरह की सहायक सामग्री और छोटे वाहनों में 21 तथा बड़े एंबुलेंस में 25 प्रकार के सर्जिकल उपकरण अनिवार्य रूप से मौजूद रहने चाहिए।

जांच में यह सामने आया कि दवाओं की मियाद खत्म होने के बावजूद उन्हें वाहनों से हटाकर नई दवाएं उपलब्ध नहीं कराई गई थीं। हालांकि, राहत की बात यह है कि ये दवाएं वास्तव में किसी मरीज को दी गईं या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आपात स्थिति में ऐसी एक्सपायरी दवाएं उपलब्ध रहना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है।

सेवा प्रदाता एजेंसी 'जेन प्लस' को दिया गया निर्देश

मामला सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य समिति ने जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी है। एंबुलेंस का संचालन करने वाली आउटसोर्स एजेंसी 'जेन प्लस' को पाई गई सभी तकनीकी कमियों और एक्सपायरी दवाओं को तत्काल बदलने तथा नियमित निगरानी व्यवस्था दुरुस्त करने का सख्त निर्देश दिया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि बाकी बचे वाहनों की जांच प्रक्रिया जारी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जो कमियां उजागर हुई हैं, उन्हें कितनी जल्दी दूर किया जाता है और जवाबदेह कर्मियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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"जांच में मिलीं तकनीकी खामियों और एक्सपायरी दवाओं के संबंध में एंबुलेंस सेवा प्रदाता एजेंसी 'जेन प्लस' को सूचित कर दिया गया है। एंबुलेंस में दवाओं की नियमित वैधता जांचने और सभी तकनीकी खामियों को दूर करने का निर्देश दिया गया है। पूरी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी गई है तथा शेष बचे वाहनों की जांच जारी है।"

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— सुधांशु नारायण लाल, (DPM), जिला स्वास्थ्य समिति, लखीसराय