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मिट्टी की सेहत से जुड़ेगी खेती की सफलता, लखीसराय में डॉ. अनिल जोशी ने किसानों को बताया प्रकृति का महत्व

Published: Fri, 16 Oct 2026 09:59 AM (IST)

अंतरराष्ट्रीय साइकिल यात्रा के तहत पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी लखीसराय पहुंचे। उन्होंने किसान संवाद में जैविक कृषि, मिट्टी के स्वास्थ्य और पारंपरिक बीजों के महत्व पर जोर दिया।

पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी।

 पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी।

HighLights

  1. डॉ. अनिल जोशी ने जैविक कृषि, मिट्टी के स्वास्थ्य पर जोर दिया।

  2. पारंपरिक बीजों, स्थानीय खान-पान और जल संरक्षण का आह्वान।

  3. लखीसराय में किसानों ने साझा किए सफल जैविक खेती के अनुभव।

जागरण संवाददाता, लखीसराय। नेपाल के जनकपुर से प्रारंभ हुई 50 दिवसीय बहुचर्चित अंतरराष्ट्रीय साइकिल यात्रा के तहत पद्म श्री एवं पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित देश के प्रख्यात पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी गुरुवार को लखीसराय जिले के गढ़ी बिसनपुर पहुंचे।

यहां सामाजिक संगठन 'प्रवाह' (प्रवास) संस्था द्वारा अंतरराष्ट्रीय साइकिल यात्रा दल का अत्यंत गर्मजोशी और भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर आयोजित विशेष किसान संवाद कार्यक्रम में लगभग 100 महिला प्रगतिशील कृषकों सहित 150 से अधिक स्थानीय किसानों ने हिस्सा लिया और जैविक कृषि की संभावनाओं पर विचार-मंथन किया।

कार्यक्रम के दौरान लखीसराय के प्रगतिशील किसान गोपाल चौधरी ने देशी गोबर की खाद से उत्कृष्ट पैदावार प्राप्त करने के अपने सफल अनुभवों को साझा किया।

वहीं, क्षेत्र में 'मिलेट किंग' के नाम से चर्चित नवीन कुमार ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे गंभीर दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए जैविक खेती और मोटे अनाज (श्री अन्न) की खेती अपनाने पर बल दिया।

खेती का पैमाना केवल पैदावार नहीं, मिट्टी की सेहत भी हो: डॉ. जोशी

पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने लखीसराय के किसानों के इनोवेटिव प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज कृषि प्रणाली को देखने का नजरिया बदलने की जरूरत है।

खेती की वास्तविक सफलता केवल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के आंकड़ों से तय नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि हमारी मिट्टी का स्वास्थ्य कैसा है और हम प्रकृति के संतुलन को कितना सुरक्षित रख पा रहे हैं।

उन्होंने युवाओं में तेजी से बढ़ते जंक और फास्ट फूड के चलन पर चिंता जाहिर करते हुए पारंपरिक बीजों के संरक्षण, स्थानीय खान-पान और मोटे अनाजों को दैनिक आहार में शामिल करने का आह्वान किया।

जल संरक्षण और वायु गुणवत्ता पर विशेष जोर

डॉ. जोशी ने रेखांकित किया कि वर्तमान पर्यावरण संकट केवल खेत-खलिहानों तक सीमित नहीं है, बल्कि दूषित जल और बिगड़ती वायु गुणवत्ता पूरे मानव जीवन के अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

उन्होंने पौधारोपण के साथ-साथ वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) के लिए सामूहिक जमीनी प्रयास करने पर विशेष जोर दिया।

कार्यक्रम में प्रवाह संस्था के पदाधिकारियों और क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि भावी पीढ़ियों के लिए उपजाऊ मिट्टी, सुरक्षित भोजन और स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के लिए समाज और किसानों को एक साथ मिलकर काम करना होगा।

प्रमुख विचार व अनुभव साझाकरण:

प्रतिभागी / वक्ता विषय व प्रमुख सुझाव
डॉ. अनिल प्रकाश जोशी (पर्यावरणविद्) मिट्टी का स्वास्थ्य, प्रकृति संतुलन, पारंपरिक बीज, जल संरक्षण एवं जंक फूड से दूरी
गोपाल चौधरी (प्रगतिशील किसान) गोबर की देशी खाद के प्रयोग से बेहतर पैदावार लेने का सफल अनुभव
नवीन कुमार ('मिलेट किंग') रासायनिक खादों के दुष्प्रभावों से बचाव और मोटे अनाज (मिलेट्स) की जैविक खेती पर जोर

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"कृषि की सफलता सिर्फ इस बात से नहीं मापी जा सकती कि गोदामों में कितना अनाज भरा है, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करती है कि हमारी मिट्टी कितनी जीवंत है और पर्यावरण कितना संतुलित है। हमें रासायनिक खादों का चक्र तोड़कर मिट्टी और जल को बचाना ही होगा।"

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— डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, पद्म भूषण व पर्यावरणविद्