किशनगंज। आदिवासियों के हमले में घायलों को गंभीर हालत में एमीएम मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। जहां सभी घायलों का सफल ऑपरेशन करते हुए तीर निकाला गया। 23 सदस्यीय चिकित्सकों की टीम ने घंटे भर तक चले ऑपरेशन में घायलों की जान बचाई जा सकी। ऑपरेशन बाद अस्पताल प्रशासन ने बताया कि घायलों की स्थिति गंभीर जरूर है लेकिन सभी अब खतरे से बाहर हैं। घायलों में मुख्य रूप से जोड़ीगाछ निवासी मो. फजीर, पिता जमरूल हक को छाती व पेट में तीर लगा हुआ था। वहीं गाड़ीगाछ निवासी मो. कलाम, पिता मोफिजुद्दीन को जांघ में, धुलाबाड़ी निवासी मो. सरीफ, पिता सलीम को कमर के पिछले हिस्से में, धुलाबाड़ी निवासी मो. समशाद, पिता मो. अनीस को पैर व छाती में और धुलाबाड़ी के ही मो. मफेजूल, पिता कमरूद्दीन को घुटना में तीर लगा हुआ था।

बताते चलें कि बुधवार को ठाकुरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत सखुआडाली पंचायत के धुलावाड़ी गांव स्थित चाय बागान के ईदगाह में नमाज पढने गए लोगों पर आदिवासियों ने हमला कर दिया। पारंपरिक हथियार से लैस आदिवासियों के हमले में तीर लगने पांच लोग घायल हो गए। सभी घायलों को स्थानीय लोगों ने सबसे पहले ठाकुरगंज पीएचसी में भर्ती कराया। जहां घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए रेफर कर दिया गया। आनन फानन में सदर अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन पेट, छाती, कमर , घुटना व अन्य जगहों पर लगे तीर से बुरी तरह घायल सभी पांचों युवकों को सिविल सर्जन स्वयं एमजीएम मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे।

इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार घोष ने बताया कि चिकिसक दल के द्वारा त्वरित सभी जरूरी उपचार एवं जरूरी आपरेशन किया गया। डॉ. घोष ने बताया कि 23 सदस्यीय चिकित्यकों की अलग-अलग टीम बनाई गई। जिसमें सर्जरी विभाग से डॉ. प्रो. संजीब चौधरी के युनिट में डॉ. हिरणमय भट्टाचर्य, डॉ. वेद आर्या, डॉ. सौरभ कुमार, डॉ. नेहा मोकीम, डॉ. पियुष, डॉ. अभय, डॉ सुभाष ने अलग-अलग टीम बनाकर घायलों का ऑपरेशन किया। वहीं मुख्य चिकित्सक डॉ. हिरणमय भट्टाचय ने बताया कि मो. फजीर के ईपीगेस्टीन रिजन में लगभग 5-6 इंच अंदर तक तीर धंसा होने के कारण ऑपरेशन आसान नहीं था। तुरंत मो. मोफीज को पांच बोतल खून की जरूरत पड़ी, जिसे अस्पताल प्रशासन द्वारा अविलंब निश्शुल्क उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा जरूरी दवाईयां भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि आपरेशन सफल रहा। सभी मरीज फिलहाल ठीक हैं, कुछ दिनो में पहले की तरह चल-फिर सकेंगे। घायलों का ऑपरेशन व इलाज माता गुजरी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. इच्छित भारत के नेतृत्व में किया गया। जिसमें मुख्य रूप से हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल कुमार, डॉ. अनुभव, डॉ. अमित, डॉ. कुणाल, डॉ. अशोक, डॉ. अभिषेक, डॉ. आनंद, डॉ. सौरभ, डॉ. सि़द्धार्थ व ऐनेस्थेसिया विभाग के डॉ. अनिल जैन, डॉ. कुमार शैलेन्द्र, डॉ. रूचि, डॉ. पोलीसेठी, डॉ. रविन्द्र, डॉ. मनीष व अन्य शामिल थे।

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Posted By: Jagran

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